स्कूलों को राजनीति का मंच न बनाएं, बच्चों को पढ़ने दें: खिलावन बघेल
रात में दीप जलाने और दिनभर रंगोली बनवाने पर उठाए सवाल, कहा- बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ बंद करे सरकार
महासमुंद। शहर कांग्रेस कमेटी के मंडल अध्यक्ष एवं अधिवक्ता खिलावन बघेल ने स्कूली छात्र-छात्राओं को राजनीतिक एवं सरकारी आयोजनों में शामिल किए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्कूल बच्चों के भविष्य की नींव हैं, राजनीति का मंच नहीं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के समय आयोजनों में बुलाकर उनकी शिक्षा बाधित करना उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
बघेल ने आरोप लगाया कि विद्यार्थियों से दिनभर तेज धूप में बड़ी-बड़ी रंगोलियां बनवाई जा रही हैं और रात में दीप जलाने के लिए भी स्कूलों में बुलाया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि यदि रात में किसी नाबालिग छात्र-छात्रा के साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? उन्होंने कहा कि प्रदेश में चाकूबाजी, हिंसा, नशे और नाबालिगों के हथियार लेकर घूमने जैसी घटनाओं के बीच बच्चों की सुरक्षा को लेकर शासन-प्रशासन को गंभीर होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बच्चों को किसी राजनीतिक दल के प्रचार या शक्ति प्रदर्शन का हिस्सा बनाने के बजाय पुस्तकालय, प्रयोगशाला, खेल, विज्ञान गतिविधियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जोड़ना चाहिए। बच्चे राजनीतिक कार्यकर्ता नहीं, प्रदेश का भविष्य हैं।
बघेल ने शासन से सवाल किया कि क्या स्कूल का प्रत्येक शैक्षणिक दिन महत्वपूर्ण नहीं है? क्या आयोजनों में बुलाने से पहले पढ़ाई पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन किया जाता है? क्या अभिभावकों की राय ली जाती है?
उन्होंने सरकारी स्कूलों में निःशुल्क पाठ्यपुस्तकों के वितरण में देरी पर भी जांच की मांग की। कहा कि जिन स्कूलों में अब तक किताबें नहीं पहुंची हैं, वहां तत्काल वितरण कराया जाए। बघेल ने कहा, “बच्चों को मंच नहीं, पुस्तक चाहिए। नारे नहीं, शिक्षा चाहिए और भीड़ नहीं, बेहतर भविष्य चाहिए।”
