अर्नब तूफान ने खेतों में बिछाई किसानों की उम्मीदें, धान की फसल को बड़ा झटका

50-60 किमी की रफ्तार से चली हवाएं, 24 घंटे में 41.7 मिमी बारिश; पककर तैयार धान जमीन पर, पानी में डूबी बालियां, मुआवजे की मांग तेज
महासमुंद। अर्नब तूफान का असर महासमुंद जिले में किसानों के लिए मुसीबत बनकर सामने आया है। पिछले 24 घंटे से तेज हवाओं और बारिश के चलते खेतों में पककर तैयार हो रही धान की फसल बड़ी मात्रा में जमीन पर बिछ गई है। करीब 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाओं ने तैयार फसल को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। खेतों में गिरी धान की बालियां बारिश के पानी में डूबने लगी हैं, जिससे दाने के खराब होने, गुणवत्ता प्रभावित होने और उत्पादन में कमी की आशंका बढ़ गई है। धान के साथ सब्जी फसलों पर भी मौसम की मार पड़ी है।
जिले में पिछले 24 घंटे में औसतन 41.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इनमें पिथौरा तहसील में सर्वाधिक 67 मिमी, जबकि कोमाखान में सबसे कम 21.6 मिमी बारिश रिकॉर्ड हुई। बारिश और तेज हवा का यह दौर उस समय आया है, जब खेतों में धान की फसल पककर कटाई की तैयारी में थी। ऐसे में किसानों के सामने खेत में खड़ी फसल को बचाने के साथ ही गिर चुकी फसल को संभालने की दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है।
बाली पानी में डूबी तो दाने की गुणवत्ता पर खतरा
तेज हवा से धान के पौधे जमीन पर गिरने के बाद बारिश ने किसानों की परेशानी और बढ़ा दी है। कई खेतों में धान की बालियां पानी के संपर्क में हैं। लंबे समय तक पानी में रहने पर दाने की गुणवत्ता प्रभावित होने और कटाई के बाद भंडारण में भी परेशानी की आशंका है। किसानों को डर है कि फसल की पैदावार और बाजार मूल्य दोनों पर इसका असर पड़ सकता है। पहले ही खेती में बीज, खाद, दवा, मजदूरी और सिंचाई पर खर्च कर चुके किसानों के लिए यह नुकसान सीधे आर्थिक झटके में बदल सकता है।
फसल के साथ किसानों का हिसाब भी बिगड़ा
किसानों के लिए नुकसान सिर्फ खेत में गिरी फसल तक सीमित नहीं है। तैयार धान के गिरने से कटाई में अतिरिक्त श्रम और खर्च बढ़ सकता है। पानी में भीगी फसल को सुखाने और सुरक्षित रखने की चुनौती अलग है। यदि बारिश का दौर आगे भी जारी रहा तो खेतों में खड़ी और गिरी दोनों तरह की फसल को नुकसान बढ़ने की आशंका है। यही वजह है कि प्रभावित किसान अब फसल नुकसान का तत्काल सर्वे कराकर मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं।
प्रशासन अलर्ट, गांवों में निगरानी बढ़ी
तूफान और संभावित भारी बारिश को देखते हुए जिला प्रशासन ने भी सतर्कता बढ़ा दी है। विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 29 अक्टूबर को जिले के सभी विद्यालयों में एक दिन का अवकाश घोषित किया गया। महानदी किनारे बसे गांवों में अलर्ट जारी किया गया है। आपात स्थिति से निपटने के लिए कंट्रोल रूम स्थापित कर कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है।
जिले की सभी छह तहसीलों के राजस्व निरीक्षकों और परिवीक्षाधीन पटवारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में जाकर फसल नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं।
अब किसानों की निगाहें प्रशासन के सर्वे पर टिकी हैं। खेतों में बिछी फसल के बीच किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि मौसम की मार से हुए नुकसान का आकलन कब होगा और राहत कब मिलेगी।
जिले में किसी भी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है और फसल नुकसान का आकलन कराया जा रहा है। इसके लिए सभी तहसीलों के राजस्व टीम को निर्देश दिया गया है।
विनय कुमार लंगेह, कलेक्टर, महासमुंद