तीन दिन की फीस, दो दिन में शिविर खत्म! बिरकोनी जूनियर रेडक्रॉस शिविर पर उठे सवाल

आरटीआई कार्यकर्ता पंकज साहू ने लगाया अतिरिक्त शुल्क वसूली और अनियमितता का आरोप, निष्पक्ष जांच व एक दिन की राशि लौटाने की मांग
महासमुंद। बिरकोनी में आयोजित जूनियर रेडक्रॉस शिविर को लेकर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। सामाजिक एवं आरटीआई कार्यकर्ता पंकज साहू ने आरोप लगाया है कि 27, 28 और 29 तारीख तक प्रस्तावित तीन दिवसीय शिविर का आयोजन दो दिन में ही समाप्त कर दिया गया, जबकि विद्यार्थियों से तीन दिन के शिविर के नाम पर प्रति छात्र 700 रुपए की पूरी राशि वसूल की गई। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर शुल्क वसूली और खर्च का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की है।
तीन दिन के लिए 700 रुपए शुल्क, दो दिन में समापन
पंकज साहू के मुताबिक शिविर के लिए विद्यार्थियों से 100 रुपए पंजीयन शुल्क तथा 200 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से 600 रुपए लिए गए। इस तरह प्रति विद्यार्थी कुल 700 रुपए वसूले गए। उनका आरोप है कि तीन दिन के कार्यक्रम को दो दिन में ही समाप्त कर दिया गया। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि तीसरे दिन की 200 रुपए की राशि विद्यार्थियों को वापस की जाएगी या नहीं?
भोजन व्यवस्था पर भी सवाल
आरटीआई कार्यकर्ता ने शिविर की भोजन व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि शिविर में बच्चों को भोजन के नाम पर बघारे भात, सोयाबीन-आलू की सब्जी और मुर्रा के साथ लाल चाय परोसी गई। उनका कहना है कि जब तीन दिन के आयोजन के लिए शुल्क लिया गया था तो कार्यक्रम दो दिन में समाप्त होने की स्थिति में शेष राशि और भोजन सहित अन्य मदों में खर्च का स्पष्ट हिसाब सामने आना चाहिए।
पहले से रेडक्रॉस अंशदान, फिर शिविर के नाम पर अतिरिक्त शुल्क क्यों?
साहू ने शुल्क वसूली की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि स्कूल खुलने के शुरुआती समय में ही जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में रेडक्रॉस अंशदान के रूप में शुल्क जमा कराया जा चुका है। ऐसे में अलग से जूनियर रेडक्रॉस शिविर के लिए अतिरिक्त राशि क्यों ली जा रही है, इसका जवाब शिक्षा विभाग को देना चाहिए।
दो माह पहले काउंसलरों से भी 450 रुपए वसूली का आरोप
पंकज साहू ने दावा किया कि यह पहला मामला नहीं है। उनके अनुसार करीब दो माह पहले भी पूरे जिले से प्रति काउंसलर 450 रुपए की राशि वसूल की गई थी। उनका कहना है कि संबंधित आदेश में जिला शिक्षा अधिकारी का नाम और पदनाम अंकित था, जबकि हस्ताक्षर अंजलि बरमाल के थे। साहू के मुताबिक इस संबंध में जानकारी लेने पर जिला शिक्षा अधिकारी को भी इसकी जानकारी नहीं होने की बात सामने आई।
जांच और शुल्क का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग
आरटीआई कार्यकर्ता ने सवाल उठाया है कि जूनियर रेडक्रॉस सोसायटी के नाम पर शुल्क वसूली और उसके उपयोग की व्यवस्था आखिर किसके जिम्मे है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, शिविर में प्राप्त कुल राशि और खर्च का मदवार हिसाब सार्वजनिक करने तथा यदि तीन दिन के बजाय दो दिन ही शिविर आयोजित किया गया है तो विद्यार्थियों से वसूली गई अतिरिक्त राशि वापस करने की मांग की है। मामले को लेकर शिक्षा विभाग में चर्चा तेज है और अभिभावकों के बीच भी सवाल उठने लगे हैं।