बाल विज्ञान कांग्रेस में भोजन के नाम पर खानापूर्ति!
जिला स्तरीय आयोजन में पांचों विकासखंडों से पहुंचे छात्र-शिक्षक, दोने में एक चम्मच भात और टमाटर की पतली चटनी परोसे जाने की शिकायत
महासमुंद। जिला स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस 2026 जैसे महत्वपूर्ण शैक्षणिक आयोजन में विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए की गई भोजन व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। 28 अक्टूबर को सजेस्ट हिंदी माध्यम स्कूल, महासमुंद में आयोजित कार्यक्रम में जिले के पांचों विकासखंड महासमुंद, बागबाहरा, पिथौरा, बसना और सरायपाली से छात्र-छात्राएं एवं शिक्षक पहुंचे थे। सुबह करीब 9:30 बजे ही प्रतिभागियों की उपस्थिति हो गई थी। लेकिन कार्यक्रम के दौरान भोजन व्यवस्था को लेकर शिक्षकों और छात्रों में नाराजगी देखने को मिली।
प्लेट की जगह छोटे दोने में परोसा भोजन
शिक्षकों से लिए गए फीडबैक में भोजन व्यवस्था को लेकर जब उत्कृष्ट, अच्छा या खराब होने के विकल्प पर राय ली गई तो कई शिक्षकों ने व्यवस्था पर असंतोष जताया। शिकायत के अनुसार भोजन के नाम पर छात्रों और शिक्षकों को सामान्य भोजन की थाली या पत्तल तक उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बजाय सब्जी परोसने वाले छोटे से दोने में कथित तौर पर करीब एक चम्मच चावल दिया गया। साथ में टमाटर की पतली चटनी जैसी सामग्री परोसे जाने की बात सामने आई है।
शिकायतकर्ताओं ने नाम छापने की शर्त पर बताया कि भोजन में न पर्याप्त दाल थी, न सब्जी, न अचार-पापड़ और न ही अन्य आवश्यक खाद्य सामग्री। जिला स्तरीय शैक्षणिक कार्यक्रम में दूर-दराज के विकासखंडों से पहुंचे बच्चों और शिक्षकों के लिए इस तरह की व्यवस्था ने आयोजन की व्यवस्थागत तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
व्यवस्था के नाम पर औपचारिकता से नाराजगी
बाल विज्ञान कांग्रेस में विद्यार्थियों की वैज्ञानिक प्रतिभा और नवाचार को मंच देने के उद्देश्य से जिलेभर के छात्र शामिल हुए थे। ऐसे आयोजन में बच्चों के लिए भोजन जैसी मूलभूत सुविधा की समुचित व्यवस्था होना जरूरी है। शिक्षकों का आरोप है कि भोजन व्यवस्था में गुणवत्ता और पर्याप्तता के बजाय महज खानापूर्ति की गई।
कार्यक्रम की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी जिला शिक्षा कार्यालय की ओर से जगदीश सिन्हा संभाल रहे थे। अब सवाल यह उठ रहा है कि इतने बड़े जिला स्तरीय आयोजन में भोजन की मात्रा और गुणवत्ता की निगरानी किस स्तर पर की गई और इसके लिए निर्धारित व्यवस्था के अनुरूप भोजन उपलब्ध कराया गया था या नहीं।
फीडबैक लिया, अब जांच भी हो
कार्यक्रम के दौरान भोजन व्यवस्था को लेकर बाकायदा छात्रों और शिक्षकों से फीडबैक लिया गया। ऐसे में शिकायतों के सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि भोजन के लिए क्या मापदंड तय किए गए थे, कितने विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई थी तथा वास्तव में उन्हें क्या परोसा गया।
जिला स्तरीय आयोजन में शामिल बच्चों को पर्याप्त और सम्मानजनक भोजन उपलब्ध नहीं होने की शिकायत ने आयोजन की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब शिक्षकों की शिकायत के बाद जिम्मेदार विभाग द्वारा मामले की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग उठ रही है।
जिले से विज्ञान का 178 प्रोजेक्ट सेलेक्ट हुए थे। एक प्रोजेक्ट के साथ छात्र समेत 3 लोग आते हैं। उपर से जितना बजट दिया गया था उतने में एक समोसा या चाय बिस्किट दिया जा सकता था। फिर भी छात्र, शिक्षकों के लिए पुलाव ओर टमाटर की चटनी बनाया गया था। ताकि कोई भूखे ना रहे।
जगदीश सिन्हा, नोडल, बाल विज्ञान कांग्रेस महासमुंद
