रबी फसलों की एमएसपी में वृद्धि से किसानों में उत्साह
– दलहन-तिलहन का रकबा बढ़ाने मिलेगा प्रोत्साहन
राजनांदगांव 07 अक्टूबर 2026। केन्द्र सरकार द्वारा रबी विपणन वर्ष 2027-28 के लिए प्रमुख रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि किए जाने से किसानों में उत्साह है। केन्द्र सरकार द्वारा कुसुम, सरसों, मसूर, जौ, चना एवं गेहूं सहित सभी 6 अनिवार्य रबी फसलों के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की गई है। जारी नए समर्थन मूल्य के अनुसार कुसुम का एमएसपी 6540 रूपए से बढ़ाकर 7215 रूपए प्रति क्विंटल, सरसों का एमएसपी 6200 रूपए से बढ़ाकर 6613 रूपए प्रति क्विंटल, मसूर का एमएसपी 7000 रूपए से बढ़ाकर 7390 रूपए प्रति क्विंटल, जौ का एमएसपी 2150 रूपए से बढ़ाकर 2286 रूपए प्रति क्विंटल, चना का एमएसपी 5875 रूपए से बढ़ाकर 5958 रूपए प्रति क्विंटल तथा गेहूं का एमएसपी 2585 रूपए से बढ़ाकर 2610 रूपए प्रति क्विंटल किया गया है। इनमें कुसुम के समर्थन मूल्य में 675 रूपए प्रति क्विंटल, सरसों में 413 रूपए प्रति क्विंटल और मसूर में 390 रूपए प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है।
रबी सीजन 2026-27 में किसानों को दलहन एवं तिलहन फसलों की ओर प्रोत्साहित करने के साथ-साथ पीएम-आशा योजना के माध्यम से उपज की समर्थन मूल्य पर बिक्री की सुविधा उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है। इससे किसानों को बाजार मूल्य में उतार-चढ़ाव की स्थिति में अपनी उपज का उचित मूल्य प्राप्त करने का भरोसा मिलेगा। एमएसपी में वृद्धि और समर्थन मूल्य पर खरीदी की व्यवस्था से दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती के प्रति किसानों का रूझान बढ़ेगा। इससे किसान धान पर निर्भरता कम करते हुए सरसों, मसूर, चना सहित अन्य दलहन-तिलहन फसलों का रकबा बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित होंगे। जिले में किसान भी फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। धान के स्थान पर दलहन एवं तिलहन फसलों को अपनाकर किसान रबी सीजन में वैकल्पिक फसलों की ओर बढ़ रहे हैं।
इसी क्रम में छुरिया विकासखंड के ग्राम गेरूघाट के कृषक लखन सुकालु गोंड 2 हेक्टेयर रकबे में सरसों फसल की खेती करते हैं। उन्होंने बताया कि सरसों के समर्थन मूल्य में वृद्धि होने से उनका संबल बढ़ा है और सरसों की खेती के प्रति उनका उत्साह बढ़ा है। इसी प्रकार ग्राम कान्हारपुरी के कृषक गणेश जोशी धान के स्थान पर 1 हेक्टेयर रकबे में सरसों फसल की खेती करते हैं। उन्होंने भी समर्थन मूल्य में वृद्धि के लिए शासन के प्रति धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया है। दोनों कृषक धान के स्थान पर सरसों फसल को अपनाकर फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं। समर्थन मूल्य में वृद्धि और पीएम-आशा योजना के माध्यम से उपज की बिक्री की सुविधा मिलने से सरसों जैसी तिलहन फसलों की खेती के प्रति किसानों का भरोसा और मजबूत हुआ है। शासन की इन किसान हितैषी पहल से दलहन-तिलहन का रकबा बढ़ाने, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने तथा खेती को अधिक लाभकारी बनाने में मदद मिलेगी। किसानों ने रबी फसलों की एमएसपी में वृद्धि तथा पीएम-आशा योजना के माध्यम से समर्थन मूल्य पर बिक्री की सुविधा के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया है।
