वन अफसरों को घेरकर पीटा, पांच घंटे बनाया बंधक
तमोरा के जंगल में अतिक्रमणकारियों का दुस्साहस; रेंजर-डिप्टी रेंजर से मारपीट, पर्स और मोबाइल छीना, पुलिस-वन अमले ने घेराबंदी कर कराया मुक्त
महासमुंद। बागबाहरा वन परिक्षेत्र के तमोरा आरक्षित वन में मंगलवार देर रात वन अमले के साथ गंभीर मारपीट और बंधक बनाने का मामला सामने आया है। वनभूमि पर अतिक्रमण और अवैध गतिविधियों की सूचना पर गश्त करने पहुंचे रेंजर नवीन वर्मा और डिप्टी रेंजर नवीन शर्मा को कुछ लोगों ने घेर लिया। आरोप है कि उनके साथ गाली-गलौज और लाठी-डंडों से मारपीट की गई। इसके बाद दोनों अधिकारियों को एक छोटे मकान में करीब पांच घंटे तक बंधक बनाकर रखा गया। इस दौरान रेंजर का पर्स और डिप्टी रेंजर का मोबाइल फोन भी छीन लिया गया।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और वन विभाग का अमला सक्रिय हुआ। बागबाहरा और महासमुंद वन परिक्षेत्र की टीम पुलिस बल के साथ तमोरा पहुंची। मौके पर काफी देर तक बातचीत और विवाद की स्थिति बनी रही। अंततः पुलिस और वन अमले ने सुरक्षा घेरा बनाकर दोनों अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद दोनों का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया।
अवैध शिकार की सूचना पर निकली थी टीम
जानकारी के अनुसार, रेंजर नवीन वर्मा मंगलवार रात वन अमले के साथ ढोड परिसर में गश्त पर थे। टीम को क्षेत्र में अवैध शिकार की सूचना मिली थी। उनके साथ डिप्टी रेंजर नवीन शर्मा, वनकर्मी टोमन दीवान, महेश चंद्राकर, पूनम साहू और चालक हरदेव वर्मा भी मौजूद थे।
गश्ती दल तमोरा क्षेत्र में पहुंचा तो वहां कुछ लोगों ने वन अमले से विवाद शुरू कर दिया। आरोप है कि गाली-गलौज करते हुए लाठी-डंडों से अधिकारियों को घेर लिया गया। स्थिति बिगड़ने पर कुछ वनकर्मी वहां से सुरक्षित स्थान की ओर चले गए, जबकि रेंजर नवीन वर्मा और डिप्टी रेंजर नवीन शर्मा मौके पर ही रह गए। इसके बाद दोनों अधिकारियों के साथ मारपीट की गई।
सामान छीना, मकान में रखा बंधक
मारपीट के दौरान दोनों अधिकारियों को चोटें आने की बात सामने आई है। आरोप है कि हमलावरों ने रेंजर का पर्स और डिप्टी रेंजर का मोबाइल भी छीन लिया। इसके बाद दोनों को एक छोटे मकान में ले जाकर करीब पांच घंटे तक उनकी इच्छा के विरुद्ध बंधक बनाए रखा गया।
घटना की गंभीरता को देखते हुए वन अधिकारियों ने तत्काल उच्चाधिकारियों के साथ-साथ बागबाहरा और खल्लारी थाना पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस बल और वन विभाग की टीमें तमोरा के लिए रवाना हुईं।
पुलिस पहुंची तो भी छोड़ने को तैयार नहीं थे
पुलिस और वन अमले के मौके पर पहुंचने के बाद अधिकारियों को मुक्त कराने के लिए संबंधित लोगों से बातचीत की गई। बताया जा रहा है कि इस दौरान भी दोनों अधिकारियों को तत्काल छोड़ने से इनकार किया गया और पुलिस व वन अमले के साथ बहस की स्थिति बनी रही। स्थिति को देखते हुए पुलिस और वन अमले ने सुरक्षा घेरा बनाया और दोनों अधिकारियों को वहां से सुरक्षित बाहर निकाला।
पहले भी सामने आते रहे हैं विवाद
तमोरा क्षेत्र में वनभूमि पर अतिक्रमण और वन विभाग के काम में बाधा का यह पहला मामला नहीं है। वन विभाग के अनुसार, मार्च 2026 में अतिक्रमण के प्रयासों को लेकर कई वन अपराध प्रकरण दर्ज किए गए थे। इसके बाद मई में वृक्षारोपण के लिए क्षेत्र तैयार करने के दौरान वन अमले के साथ अभद्र व्यवहार, गाली-गलौज, धमकी और शासकीय कार्य में बाधा की शिकायत पर पुलिस कार्रवाई भी हुई थी।
जुलाई में भी वनभूमि पर दोबारा जुताई कर खेती करने तथा रोपित बांस और सागौन के पौधों को नुकसान पहुंचाने के प्रयासों को लेकर वन विभाग ने कार्रवाई की थी। विभाग के मुताबिक, दिसंबर 2025 में जिला प्रशासन, वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने संबंधित लोगों को वनभूमि पर अतिक्रमण नहीं करने और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने की समझाइश भी दी थी।
घटना के बाद वन अमले में बढ़ी चिंता
तमोरा में रेंजर और डिप्टी रेंजर को घेरकर मारपीट किए जाने और घंटों बंधक बनाए रखने की घटना से वन अमले में चिंता का माहौल है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि वनभूमि की सुरक्षा और अतिक्रमण रोकने के दौरान लगातार विरोध का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान घटना में मारपीट, धमकी, शासकीय कार्य में बाधा, सामान छीनने और अधिकारियों को उनकी इच्छा के विरुद्ध बंधक बनाए रखने के आरोप सामने आए हैं।
वन विभाग के अनुसार उपलब्ध साक्ष्यों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य अभिलेखों के आधार पर घटना में शामिल लोगों की पहचान और भूमिका की जांच की जा रही है। संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि वनभूमि पर अतिक्रमण, वन संपदा को नुकसान पहुंचाने तथा शासकीय कार्य में बाधा डालने के मामलों में कार्रवाई जारी रहेगी।
