पुरानी गंज मंडी की जमीन पर फिर गरमाया विवाद, नगर पालिका ने मांगा 4 खसरों का मालिकाना हक

नेता प्रतिपक्ष ने कलेक्टर से की जांच की मांग; कहा- बिना बिक्री-पंजीयन के कृषि उपज मंडी के नाम दर्ज की गई जमीन, पालिका को हो रहा करोड़ों का नुकसान
महासमुंद। नगर पालिका परिषद के स्वामित्व वाली वार्ड क्रमांक 19 स्थित पुरानी गंज मंडी की जमीन को लेकर विवाद एक बार फिर सामने आया है। नगर पालिका के नेता प्रतिपक्ष हरबंस सिंह (नानू भाई) ने कलेक्टर को शिकायत सौंपकर खसरा नंबर 1194/40, 1194/41, 1194/42 और 1194/43 की भूमि को कथित रूप से विधि विरुद्ध कृषि उपज मंडी समिति के नाम दर्ज किए जाने की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने राजस्व अभिलेखों की जांच के बाद इन खसरों में नगर पालिका का नाम दर्ज करने के निर्देश जारी करने का आग्रह किया है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उक्त चारों खसरे नगर पालिका की भूमि हैं और इन्हें नगर पालिका द्वारा कभी भी किसी संस्था या व्यक्ति के पक्ष में विक्रय नहीं किया गया। इसके बावजूद राजस्व दस्तावेजों, बी-1 एवं ऋण पुस्तिका में कृषि उपज मंडी का नाम दर्ज कर दिया गया। नेता प्रतिपक्ष ने इस नामांतरण को नियम विरुद्ध बताते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की है।
1971 की रजिस्ट्री में अलग खसरे, फिर 1194 के चार खसरे कैसे दर्ज हुए?
शिकायत में सबसे अहम आधार 15 जनवरी 1971 की रजिस्ट्री को बनाया गया है। इसके अनुसार तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष महासमुंद ने कृषि उपज मंडी समिति के अध्यक्ष के पक्ष में खसरा नंबर 1523/1, 1525/3, 1520/4, 1505/1, 1506/4 ख और 1505/3 घ की भूमि की रजिस्ट्री की थी। आरोप है कि इस रजिस्ट्री में खसरा नंबर 1194/40, 1194/41, 1194/42 और 1194/43 का उल्लेख नहीं है। इसके बावजूद बाद के राजस्व अभिलेखों में इन चार खसरों को कृषि उपज मंडी के नाम दर्ज किया जाना सवाल खड़े करता है।
हरबंस सिंह ने मांग की है कि यदि कृषि उपज मंडी समिति के पास इन चार खसरों की कोई वैध रजिस्ट्री अथवा पंजीयन दस्तावेज है तो उसे सार्वजनिक करते हुए नगर पालिका को उपलब्ध कराया जाए। अन्यथा राजस्व अभिलेखों से कृषि उपज मंडी का नाम हटाकर नगर पालिका का नाम दर्ज किया जाए।
1954-55 के अभिलेखों का भी दिया हवाला
शिकायत में कहा गया है कि नगर के अधिकार अभिलेख वर्ष 1954-55 में भी खसरा नंबर 1194/40, 1194/41, 1194/42 और 1194/43 का पृथक अस्तित्व दर्ज है। शिकायतकर्ता का दावा है कि इन खसरों की स्थिति में बाद में कोई वैधानिक परिवर्तन नहीं हुआ और ये वर्ष 1971 से पहले भी नगर पालिका के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज रहे हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया है कि तत्कालीन राजस्व अधिकारियों द्वारा इन खसरों को कृषि उपज मंडी के नाम दर्ज किया जाना नियमों के विपरीत है। उन्होंने पूरे रिकॉर्ड की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग भी की है।
10.502 हेक्टेयर शासकीय जमीन पहले से मंडी के उपयोग में
शिकायत में 9 जुलाई 1982 के तत्कालीन कलेक्टर रायपुर के आदेश का भी उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार ग्राम पिटियाझर में कुल सात खसरा नंबरों की 10.502 हेक्टेयर शासकीय भूमि का अग्रिम आधिपत्य 17 अक्टूबर 1982 को कृषि उपज मंडी महासमुंद को सौंपा गया था। शिकायतकर्ता का तर्क है कि जब कृषि उपज मंडी के पास पहले से इतनी शासकीय भूमि उपयोग के लिए उपलब्ध है, तो नगर पालिका की उक्त चार खसरों वाली जमीन को मंडी के नाम दर्ज रखने की आवश्यकता पर भी जांच होनी चाहिए।
नई जगह बस स्टैंड, पुरानी गंज मंडी में सब्जी बाजार की योजना
हरबंस सिंह ने पुरानी गंज मंडी की जमीन को नगर हित में उपयोग करने का प्रस्ताव भी रखा है। उनका कहना है कि नगर पालिका द्वारा ग्राम लंभरा के आगे नया बस स्टैंड विकसित करने की प्रक्रिया चल रही है, जो शहर से लगभग चार किलोमीटर दूर है। ऐसे में पुरानी गंज मंडी की जमीन नगर पालिका को वापस मिलती है तो इसके एक हिस्से में व्यवस्थित सब्जी बाजार तथा दूसरे हिस्से में किराना एवं अन्य व्यवसायियों को व्यवस्थित किया जा सकता है।
शिकायत के अनुसार इससे शहर के मुख्य मार्गों पर यातायात का दबाव कम होगा और लोगों को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे। साथ ही वर्तमान बस स्टैंड और सब्जी बाजार की जमीन के पुनर्व्यवस्थापन से करीब दो एकड़ का मैदान विकसित करने की संभावना भी जताई गई है। शिकायतकर्ता का दावा है कि इससे नगर पालिका की आय में भी वृद्धि हो सकती है।
“पालिका को हो रहा करोड़ों का नुकसान”
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि नगर पालिका के पूर्व अधिकारी और पदाधिकारियों ने इन खसरों को अपने पक्ष में दर्ज कराने के लिए प्रभावी पहल नहीं की, जिसके कारण नगर पालिका को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कलेक्टर से पूरे राजस्व रिकॉर्ड, पुराने अधिकार अभिलेख, रजिस्ट्री और नामांतरण प्रक्रिया की जांच कर चारों खसरों को नगर पालिका के नाम दर्ज कराने की कार्रवाई शुरू करने की मांग की है।
उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि मामले का समय पर निराकरण नहीं किया गया तो अनावश्यक न्यायिक विवाद बढ़ सकता है।