अर्नब चक्रवात से तबाह हुई खरीफ फसल, किसानों को मिले 40 हजार प्रति एकड़ मुआवजा
जिला पंचायत सदस्य जागेश्वर जुगनू चंद्राकर ने केंद्र से पीएम केयर्स फंड के जरिए विशेष राहत पैकेज घोषित करने की उठाई मांग, सभी 33 जिलों में तत्काल फसल क्षति सर्वे कराने पर दिया जोर
महासमुंद। अर्नब चक्रवात और बेमौसम भारी बारिश ने छत्तीसगढ़ के किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। खेतों में कटाई के लिए तैयार धान सहित अन्य खरीफ फसलें बारिश और चक्रवात की चपेट में आकर बर्बाद हो गई हैं। इससे किसानों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है। फसल नुकसान से प्रभावित किसानों को राहत दिलाने के लिए जिला पंचायत सदस्य जागेश्वर जुगनू चंद्राकर ने केंद्र सरकार से प्रत्येक प्रभावित किसान को 40 हजार रुपए प्रति एकड़ मुआवजा देने की मांग की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पीएम केयर्स फंड के माध्यम से छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए विशेष राहत पैकेज घोषित करने का आग्रह किया है।
चंद्राकर ने कहा कि किसान कई महीनों तक दिन-रात मेहनत कर धान और दूसरी खरीफ फसलें तैयार करता है। खाद, बीज, कीटनाशक, डीजल, सिंचाई और मजदूरी पर हजारों रुपए खर्च करने के बाद जब फसल घर लाने का समय आता है, तब प्राकृतिक आपदा उसकी पूरी मेहनत बर्बाद कर देती है। अर्नब चक्रवात और बेमौसम बारिश से फसलें प्रभावित होने के कारण किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में उनके सामने परिवार का भरण-पोषण, कृषि ऋण चुकाने, बच्चों की पढ़ाई और अगली फसल की तैयारी तक का संकट खड़ा हो गया है।
सभी 33 जिलों में तत्काल सर्वे की मांग
जागेश्वर चंद्राकर ने मांग की है कि प्रदेश के सभी 33 जिलों में चक्रवात और बेमौसम बारिश से प्रभावित फसलों का निष्पक्ष एवं तत्काल सर्वे कराया जाए। जिन किसानों की धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हुई है, उन्हें प्राथमिकता से राहत राशि दी जाए। इसके साथ ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के पात्र किसानों को बीमा दावा राशि का शीघ्र भुगतान किया जाए। प्रभावित किसानों को कृषि ऋण की वसूली में राहत देते हुए अतिरिक्त समय भी दिया जाए।
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से संयुक्त रूप से विशेष किसान राहत पैकेज घोषित करने तथा मुआवजा वितरण की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की मांग की है।
सर्वे और आश्वासन नहीं, किसानों को चाहिए तत्काल राहत
चंद्राकर ने कहा कि किसानों को केवल सर्वेक्षण और आश्वासन तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। फसल बर्बाद होने के बाद किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता मिलना जरूरी है, ताकि वे इस संकट से उबरकर अगली फसल की तैयारी कर सकें। उन्होंने प्रधानमंत्री से पीएम केयर्स फंड के माध्यम से विशेष सहायता उपलब्ध कराने और राज्य सरकार को शीघ्र सर्वेक्षण कर राहत वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश देने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि किसान कोई खैरात नहीं मांग रहा है, बल्कि अपनी महीनों की मेहनत से तैयार की गई बर्बाद फसल का उचित मुआवजा मांग रहा है। प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहे अन्नदाताओं को आर्थिक संकट से उबारना सरकार और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
