डीएमएफ की पहल से बरबसपुर में प्रकाश व्यवस्था मजबूत, ग्रामीणों को मिली रात में सुविधा

बरबसपुर चौक में सोलर हाईमास्ट से रोशनी, सुरक्षा और आवागमन को मिला सहारा
कोरबा 08 अक्टूबर 2026/सूरज ढलने के बाद गांव की सड़कें और चौक-चौराहे रोशनी से जुड़ जाएं तो रात का आवागमन सहज हो जाता है। दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में प्रकाश की सुविधा लोगों की दैनिक गतिविधियों के साथ सुरक्षा और आवागमन के लिए भी महत्वपूर्ण है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए कोरबा जिला प्रशासन द्वारा खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) की स्वीकृत राशि से दूरस्थ क्षेत्रों में सौर ऊर्जा आधारित प्रकाश व्यवस्था विकसित की जा रही है। कोरबा विकासखंड के ग्राम बरबसपुर के चौक में क्रेडा विभाग द्वारा सोलर हाईमास्ट लाइट स्थापित की गई है।
सोलर हाईमास्ट की सुविधा से पहले शाम के बाद बरबसपुर चौक और आसपास के हिस्सों में पर्याप्त रोशनी नहीं रहती थी। रात में आने-जाने वाले ग्रामीणों को अंधेरे में रास्ता तय करना पड़ता था। खेतों या आसपास के हिस्सों की ओर जाने वाले लोगों को विशेष सावधानी रखनी पड़ती थी। अंधेरे में जंगली जीव-जंतुओं, सांप-बिच्छू आदि का डर भी बना रहता था।
अब बरबसपुर चौक सोलर हाईमास्ट की रोशनी से जगमगा रहा है। सड़क, चौक और आसपास के क्षेत्र में पर्याप्त प्रकाश मिलने से ग्रामीणों को रात के समय आवागमन में सुविधा हो रही है। रास्ता स्पष्ट दिखाई देने से पैदल चलने वाले लोगों को सहूलियत मिली है और शाम के बाद जरूरी काम से बाहर निकलना भी आसान हुआ है।
बरबसपुर चौक में स्थापित हाईमास्ट सौर ऊर्जा से संचालित होने के कारण इसके लिए नियमित बिजली आपूर्ति पर निर्भरता नहीं रहती और बिजली बिल का अतिरिक्त खर्च भी नहीं आता। बैटरी बैकअप की सुविधा से मौसम खराब होने या विद्युत आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भी प्रकाश उपलब्ध रहने में मदद मिलती है।
बरबसपुर के ग्रामीणों ने बताया कि, “पहले शाम होने के बाद चौक और आसपास का रास्ता अंधेरा हो जाता था। रात में आने-जाने पर रास्ता साफ दिखाई नहीं देता था और खेत की ओर जाना हो तो सांप-बिच्छू या दूसरे जीव-जंतुओं का डर भी रहता था। अब हाईमास्ट की रोशनी से चौक और सड़क अच्छी तरह दिखाई देती है। रात में आने-जाने में काफी सुविधा मिल रही है। सौर ऊर्जा से चलने वाली यह लाइट गांव के लिए बहुत उपयोगी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति हम आभार व्यक्त करते हैं कि दूरस्थ गांवों में लोगों की जरूरत के अनुसार ऐसी सुविधाएं पहुंच रही हैं।”