सोमनाथ स्वाभिमान पर्व पर अमर चंद्राकर का हमला
बोले- भगवान सोमनाथ की विरासत से ज्यादा पीएम मोदी की छवि चमकाने पर रहा जोर
महासमुंद। जिला पंचायत के पूर्व सभापति अमर अरुण चंद्राकर ने सिरपुर में आयोजित ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ कार्यक्रम को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह आयोजन भगवान सोमनाथ की गौरवशाली विरासत और भारतीय सभ्यता के इतिहास को जनमानस तक पहुंचाने के बजाय केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि चमकाने का माध्यम बनकर रह गया।
जारी विज्ञप्ति में अमर चंद्राकर ने कहा कि सोमनाथ मंदिर की एक हजार वर्षों से अधिक पुरानी संघर्षपूर्ण और गौरवमयी विरासत को महज कुछ घंटों के कार्यक्रम में समेटना नाकाफी है। उन्होंने कहा कि आयोजन में न तो छत्तीसगढ़ की पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को उचित स्थान दिया गया और न ही विश्व धरोहर बनने की दिशा में अग्रसर सिरपुर के ऐतिहासिक महत्व को प्रमुखता से सामने रखा गया।
उन्होंने कहा कि दो से तीन घंटे के कार्यक्रम में कई गतिविधियों को शामिल करना केवल औपचारिकता निभाने जैसा प्रतीत हुआ। धार्मिक अनुष्ठानों और विधि-विधान से पूजा-पाठ के लिए भी पर्याप्त समय नहीं दिया गया। चंद्राकर ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम में सुबह 10 बजे से 11 बजे तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के प्रसारण को प्रमुखता दी गई, जबकि सोमनाथ की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत पर गंभीर चर्चा के लिए पर्याप्त तैयारी और समय का अभाव रहा।
“शासकीय धन का हो रहा दुरुपयोग”
अमर चंद्राकर ने आरोप लगाया कि ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के नाम पर शासकीय धन का अपव्यय किया जा रहा है और भाजपा धार्मिक आस्था का राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा हिंदुत्व और धार्मिक ध्रुवीकरण के जरिए वोट बटोरने की राजनीति कर रही है, जबकि मंदिरों के संरक्षण, संवर्धन और ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजने की दिशा में उसके वास्तविक प्रयास नगण्य हैं।
सिरपुर को विश्व धरोहर बनाने पर उठाए सवाल
पूर्व सभापति ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि भाजपा वास्तव में हिंदू आस्था और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति गंभीर है, तो फिर 15 वर्षों की रमन सिंह सरकार और वर्तमान विष्णुदेव साय सरकार के कार्यकाल में सिरपुर को विश्व धरोहर घोषित कराने के लिए ठोस पहल क्यों नहीं की गई। उन्होंने कहा कि सिरपुर का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के लिए गंभीर प्रयासों की आवश्यकता है, न कि केवल प्रतीकात्मक आयोजनों की।
