सुशासन तिहार जनता को भ्रमित करने का प्रयास : सृष्टि अमर चंद्राकर

जिला पंचायत सदस्य ने भाजपा सरकार पर साधा निशाना
कहा- लंबित आवेदनों का अब तक नहीं हुआ निराकरण
महासमुंद। जिला पंचायत सदस्य सृष्टि अमर चंद्राकर ने भाजपा सरकार द्वारा आयोजित ‘सुशासन तिहार’ को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे महज “ढकोसला” बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता के भीतर बढ़ते आक्रोश को दबाने और अपनी विफलताओं से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के आयोजनों का सहारा ले रही है।
श्रीमती चंद्राकर ने कहा कि जब प्रत्येक मंगलवार को जिला कार्यालय में कलेक्टर जनदर्शन के माध्यम से आम लोगों की समस्याएं सुनी और निराकृत की जाती हैं, तब अलग से ‘सुशासन तिहार’ के नाम पर जनसमस्या निवारण शिविर आयोजित करने का औचित्य समझ से परे है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन पर सरकार का नियंत्रण कमजोर पड़ गया है और आम जनता द्वारा दिए जा रहे आवेदन कार्रवाई के बजाय “रद्दी की टोकरी” में फेंके जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि गरीब, मजदूर और कमजोर वर्ग के लोगों को समय पर न्याय नहीं मिल पा रहा है, जिससे आमजन में निराशा और आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। उनके अनुसार, सुशासन तिहार-2025 के दौरान महासमुंद ब्लॉक से हजारों आवेदन शासन-प्रशासन को सौंपे गए थे, लेकिन आज तक अधिकांश मामलों का निराकरण नहीं हो सका है।
महतारी वंदन योजना का उल्लेख करते हुए श्रीमती चंद्राकर ने कहा कि महासमुंद ब्लॉक में करीब 9 हजार महिलाओं ने आवेदन जमा किए थे, लेकिन उन्हें अब तक योजना का लाभ नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि शुरुआत में सरकार ने आवेदन भरवाए, लेकिन बाद में पोर्टल बंद कर दिया गया और दोबारा आवेदन की कोई व्यवस्था भी नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में बड़ी संख्या में नवविवाहित महिलाएं योजना से वंचित रह गई हैं। पात्र हितग्राहियों द्वारा कई बार आवेदन और शिकायतें देने के बावजूद शासन-प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
श्रीमती चंद्राकर ने आरोप लगाया कि तहसील और अनुविभाग स्तर पर नामांतरण, बंटवारा, फौती, नक्शा एवं खसरा से संबंधित हजारों मामले लंबित पड़े हुए हैं। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि पिछले वर्ष प्राप्त आवेदनों का अब तक निराकरण क्यों नहीं किया गया।
अंत में उन्होंने कहा कि “सुशासन तिहार” केवल सरकार की विफलताओं से जनता का ध्यान भटकाने का माध्यम बन गया है और इससे आम लोगों की वास्तविक समस्याओं का समाधान संभव नहीं है।