गौमाता को ‘राष्ट्र माता’ का दर्जा देने की मांग, गौसेवकों ने निकाली रैली
हस्ताक्षर अभियान के बाद एसडीएम को सौंपा ज्ञापन, केंद्र सरकार से विधेयक लाने की अपील
महासमुंद। गौमाता को ‘राष्ट्र माता’ का संवैधानिक दर्जा दिलाने की मांग को लेकर सोमवार को गौसेवकों ने शहर में रैली निकाली। रैली के माध्यम से अपनी मांगों को लेकर गौसेवकों ने एसडीएम महासमुंद को ज्ञापन सौंपा और केंद्र सरकार तक इसे पहुंचाने का आग्रह किया।
रैली से पहले जिला मुख्यालय के लोहिया चौक में व्यापक हस्ताक्षर अभियान चलाया गया, जिसमें बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लेकर इस मांग का समर्थन किया। गौसेवक संगठनों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने कहा कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति में गाय का विशेष महत्व रहा है, इसलिए उसे ‘राष्ट्र माता’ घोषित करना करोड़ों लोगों की भावनाओं का सम्मान होगा।
गौसेवकों ने संविधान के अनुच्छेद 48 को और अधिक कठोर बनाने की मांग करते हुए देशभर में गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और गौ-तस्करी के खिलाफ सख्त दंडात्मक प्रावधान लागू करने की आवश्यकता बताई। साथ ही उन्होंने अनुच्छेद 51-ए (च) में ‘गौ-संस्कृति संरक्षण’ को शामिल करने तथा 51-ए (छ) के तहत पर्यावरण संरक्षण के साथ देशी गौवंश के संवर्धन को प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य बनाने का सुझाव दिया।
वक्ताओं ने इस मांग के समर्थन में सामाजिक और आर्थिक तर्क भी रखे। उनका कहना था कि गौ-संरक्षण से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। जैविक खेती, बायोगैस, प्राकृतिक खाद और पंचगव्य उत्पादों के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि के साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है।
गौसेवकों ने यह भी बताया कि वर्तमान में विभिन्न राज्यों में गौहत्या से संबंधित अलग-अलग कानून लागू हैं, जिससे कानूनी असमानता की स्थिति बनती है। ऐसे में संविधान में संशोधन कर पूरे देश में एक समान और सख्त कानून लागू किया जाना आवश्यक है, ताकि गौ-तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण हो सके।
गौसेवकों ने केंद्र सरकार से आगामी संसद सत्र में इस विषय पर विधेयक लाने की मांग की। साथ ही उन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों, धार्मिक संगठनों, किसान समूहों और युवाओं से इस मुहिम का समर्थन करने की अपील करते हुए दया, करुणा और सह-अस्तित्व जैसे मूल्यों को सुदृढ़ करने पर जोर दिया।
