पक्षकारों को पीठासीन अधिकारियों ने दिए पौधरोपण का संदेश
महासमुंद। जिला मुख्यालय में शनिवार को प्रथम नेशनल लोक अदालत में विभिन्न प्रकरणों में उपस्थित पक्षकारों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती अनिता डहरिया के मार्गदर्शन पर जिला न्यायालय में स्थापित सभी खंडपीठों के पीठासीन अधिकारियों द्वारा उनके न्यायालय में आने वाले पक्षकारों को पौधरोपण करने के उद्देश्य तथा सुखद हरियाली के सदेंश देते हुए पक्षकारों को विभिन्न प्रजातियों के फलदार एवं छायादार पौधे वितरित किए गए। इसके अलावा नेशनल लोक अदालक के शुभारंभ अवसर पर विभिन्न बैंकों के शाखा प्रबंधकों को पौधा वितरण किया गया। साथ ही वन विभाग के अधिकारियों द्वारा न्यायालय परिसर में अपने प्रकरणों के लिए पहुंचे पक्षकारों तथा आम नागरिकों को पौधे वितरित किए गए। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकीय अधिकारी -कर्मचारियों द्वारा स्वास्थ्य शिविर लगाकर आम नागरिकों तथा अपने प्रकरण के निराकरण के लिए पहुंचे पक्षकारों के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया था।
मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के प्रकरण में आहतगणों के लिए अवार्ड पारित
जिला न्यायालय में आयोजित नेशनल लोक अदालत में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं खंडपीठ क्रमांक-एक के पीठासीन अधिकारी श्रीमती अनिता डहरिया के समक्ष मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के समक्ष 11 प्रकरण जो कि लंबित था, जिसे नेशनल लोक अदालत में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के 11 प्रकरणों का निराकरण करते हुए आठ मृतकों के उनके वारिसानों एवं तीन आहतगणों के लिए कुल एक करोड़ 56 लाख 35 हजार रूपए का अवार्ड पारित किया गया। इस प्रकार पीठासीन अधिकारी द्वारा समझाईश के बाद प्रकरणों का आपसी सुलाह एवं समझौते के आधार पर निराकरण किया गया। इस अवसर पर मृतकों के परिजनों व उनके वारिसानों एवं आहतगणों को पीठासीन अधिकारी द्वारा पौधारोपण करने का संदेश दिया गया।
एक साथ दांपत्य जीवन निर्वाह करने हुए सहमत
नेशनल लोक अदालत में खंडपीठ क्रमांक-02, के समक्ष धारा 144 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत भरण-पोषण की राशि दिलाए जाने के संबंध में प्रकरण लंबित था। विविध दाण्डिक प्रकरण क्रमांक 143 के आवेदिका (परिवर्तित नाम) संगीता बाई पति यादराम व उनके दो नाबालिग पुत्र और पुत्री निवासी ग्राम कोसरंगी तहसील बागबाहरा जिला महासमुंद का रहने वाला है। संगीता का विवाह पिथौरा तहसील के ग्राम डोगरीपाली निवासी यादराम के साथ अप्रैल 2018 में हिन्दू रिति रिवाज के अनुसार हुआ था। विवाह के बाद दोनों का दांपत्य जीवन ठीक चल रहा था। किन्तु विवाह के 5-6 साल बाद दोनों में आपसी अनबन होने लगा, जिससे वे दोनों जून 2025 से अलग-अलग निवास कर रहे थे। जिसका प्रकरण कुटुम्ब न्यायालय में लंबित था। प्रकरण को नेशनल लोक अदालत में राजीनामा के लिए रखा गया था। उभयपक्षकारों को कुटुम्ब न्यायालय खंडपीठ क्रमांक-दो के पीठासीन अधिकारी प्रफुल्ल कुमार सोनवानी द्वारा समझाइश दिया गया, जिससे प्रेरित होकर दंपत्तियों ने एक साथ रहने के लिए सहमत होते हुए अपना दांपत्य जीवन एक साथ निर्वाह करने के लिए तैयार हो गए। इस प्रकार उभयपक्षकारों के मध्य राजीनामा हो जाने के कारण प्रकरण की कार्यवाही समझौते के आधार पर समाप्त किया गया तथा दोनों दंपत्ति एक साथ रहकर जीवन निर्वाह करने के लिए तैयार हुए। इसी प्रकार व्यवहारवाद प्रकरण के वादी (परिवर्तित नाम) गंगाराम निषाद ग्राम शिकारीपाली तहसील बागबाहरा निवासी द्वारा धारा 09 हिन्दू विवाह अधिनियम के तहत दांपत्य अधिकारों की पुनस्थापना किए जाने के संबंध में आवेदन लंबित था। वादी गंगाराम का विवाह खल्लारी निवासी सुशीला के साथ सामाजिक रीति रिवाज के साथ मार्च 2024 में हुआ था। दोनों में आपसी रिस्ते में अनबन होने के कारण शादी के एक वर्ष बाद दोनों अलग अलग हो गए, जिसका प्रकरण न्यायालय में लंबित था। जिसे लोक अदालत में राजीनामा के लिए रखा गया था। जिसमें उभयपक्षों को कुटुम्ब न्यायालय के पीठासीन अधिकारी के द्वारा सुलह का प्रयास किए जाने उपरांत उभयपक्ष साथ रहकर दांपत्य जीवन निर्वहन करने के लिए सहमत हुए। इस प्रकार उभयपक्षों के मध्य सुलह हो जाने के कारण प्रकरण की कार्यवाही राजीनामा के आधार पर सामाप्त किया गया। साथ ही पीठासीन अधिकारी द्वारा दांपत्यों को पौधे भेट किया गया।
