बसना में जिला स्तरीय किसान मेला एवं तिलहन महोत्सव सम्पन्न
जैविक खेती और तिलहनी फसलों को बढ़ावा, किसानों ने साझा किए अनुभव
महासमुंद। नेशनल मिशन ऑन इडिबल ऑयल–ऑयल सीड (NMEO) योजना के अंतर्गत बसना विकासखण्ड के ग्राम मिलाराबाद मैदान में शनिवार को जिला स्तरीय किसान मेला एवं तिलहन महोत्सव, कृषि मेला सह कृषक–वैज्ञानिक परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन जिला पंचायत अध्यक्ष मोगरा पटेल के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य रामदुलारी सिंहा, देवकी दीवान सिन्हा, दीपा साहू, नरेश पटेल, अनुविभागीय अधिकारी हरिशंकर पैंकरा, तहसीलदार कृष्ण कुमार साहू, कृषि उपसंचालक एफ.आर. कश्यप, कृषि विभाग के अधिकारी, उन्नत किसान तथा बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष मोगरा पटेल ने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार किसानों को दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रही है तथा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सब्सिडी उपलब्ध करा रही है। उन्होंने किसानों से इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान किया।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी हेमंत नंदनवार ने किसानों से संवाद करते हुए कहा कि मिलाराबाद क्षेत्र जैविक खेती के लिए एक विशिष्ट पहचान बना रहा है। उन्होंने किसानों को उद्यानिकी फसलों की ओर बढ़ने और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
जिला पंचायत सदस्य रामदुलारी सिंहा ने कहा कि इस तरह के कृषि सम्मेलन किसानों के लिए प्रेरणादायी होते हैं, जिससे उन्हें नई तकनीकों और सफल खेती के अनुभवों से सीखने का अवसर मिलता है।
किसानों ने साझा किए अनुभव
कार्यक्रम के दौरान किसानों ने अपने अनुभव साझा किए और उन्हें प्रमाण पत्र देकर सम्मानित भी किया गया। उन्नतशील किसान अंतर्यामी प्रधान ने किसानों को संबोधित करते हुए जल संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने किसानों से धान पर निर्भरता कम कर दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती बढ़ाने, खुर्रा बोनी लाइनिंग पद्धति अपनाने, उर्वरकों का सीमित उपयोग करने तथा जैविक खेती की ओर आगे बढ़ने की सलाह दी। साथ ही उन्होंने पशुपालन को खेती के साथ जोड़ने की भी बात कही।
किसान अवध राम चौधरी ने बताया कि उन्होंने 20 एकड़ में खीरा और करेला की खेती की है और आगामी खरीफ सीजन में 5 एकड़ में उद्यानिकी फसल लगाने की योजना बना रहे हैं। वहीं युवा किसान वेदप्रकाश पटेल ने बताया कि उन्होंने शुरुआत में एक एकड़ में सरसों की खेती शुरू की थी, जो कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली फसल साबित हुई। वर्तमान में वे लगभग 100 एकड़ में सरसों की खेती कर रहे हैं, जिसमें प्रति एकड़ 6 से 8 क्विंटल उत्पादन मिल रहा है। उन्होंने बताया कि वे सोनालिका किस्म की सरसों की खेती कर रहे हैं।
जैविक खेती की ओर बढ़ रहा मिलाराबाद
मिलाराबाद क्षेत्र अब जैविक खेती के हब के रूप में अपनी नई पहचान बना रहा है। लगभग 350 एकड़ क्षेत्र में किसान रबी सीजन के दौरान दलहन, तिलहन और उद्यानिकी फसलों की खेती कर रहे हैं। यहां के अधिकांश किसान अब केवल धान पर निर्भर रहने के बजाय विविध फसलों और जैविक खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं।
कृषि उपसंचालक एफ.आर. कश्यप ने बताया कि जिले में रबी सीजन के दौरान तिलहनी फसलों का रकबा 3125 हेक्टेयर, दलहनी फसलों का 6425 हेक्टेयर तथा रागी, मक्का और गेहूं जैसी अनाज फसलें 5945 हेक्टेयर क्षेत्र में ली जा रही हैं। उन्होंने बताया कि बसना और सरायपाली विकासखंड में 500 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए 475 क्विंटल प्रमाणित मूंगफली बीज का निःशुल्क वितरण किया गया, जिससे लगभग 1700 किसान लाभान्वित हुए हैं।
इसी तरह महासमुंद, पिथौरा और बागबाहरा विकासखंड में 200 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए 200 क्विंटल मूंगफली बीज, कीटनाशक और सूक्ष्म पोषक तत्व क्लस्टर में चयनित किसानों को वितरित किए गए हैं। इनकी खरीदी की व्यवस्था बसना में एफपीओ के माध्यम से की गई है। उन्होंने बताया कि एनएमईओ तिलहन योजना के अंतर्गत जिले के सभी पांच विकासखंडों में 1080 हेक्टेयर क्षेत्र से 1040 मिट्टी नमूनों का परीक्षण कराया गया है।
