पीएम आवास दावों के विपरीत, जमीनी हकीकत चिंताजनक: विनोद

महासमुंद। पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जिले को पूर्णता में द्वितीय स्थान और राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने के दावों के विपरीत जमीनी हकीकत चिंताजनक है।
श्री चंद्राकर के अनुसार कई स्थानों पर अधूरे मकानों—बिना छत और प्लास्टर—को पोर्टल पर पूर्ण दर्शाकर राशि आहरित कर ली गई है, जबकि हितग्राही आज भी कच्चे घरों में रहने को मजबूर हैं। लाभार्थियों ने सरपंच व सचिवों पर पैसों की मांग के आरोप भी लगाए हैं। कुछ मामलों में दो हितग्राहियों की राशि से एक ही मकान बनाए जाने और पहले से बने पक्के मकानों को पीएम आवास बताकर भुगतान लेने की शिकायतें सामने आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहली किश्त के बाद दूसरी किश्त नहीं मिलने से कई परिवारों ने पुराने मकान तोड़ दिए और अब खुले आसमान के नीचे रहने को विवश हैं। पात्र आवासहीन परिवारों को दरकिनार कर अपात्रों को लाभ पहुंचाने और 10><15 हजार रुपये लेकर नाम जोड़ने जैसी शिकायतें भी मिल रही है। श्री चंद्राकर ने पीएम आवास प्लस सर्वे के पुन: निष्पक्ष सत्यापन की मांग करते हुए कहा कि यदि सही जांच नहीं हुई तो वास्तविक आवासहीन फिर वंचित रह जाएंगे। उन्होंने राज्य सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की पारदर्शी जांच की मांग की है।