सिरपुर-राजिम को राष्ट्रीय पहचान दिलाने लोकसभा में सांसद ने किए सवाल

धरोहर विकास के लिए राज्य और केंद्र दोनों से समन्वय तेज करेंगे
महासमुंद। छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत सिरपुर और राजिम को राष्ट्रीय तीर्थ पर्यटन मानचित्र पर प्रतिष्ठित करने की दिशा में लोकसभा में महत्वपूर्ण पहल की। क्षेत्र की सांसद रूपकुमारी चौधरी ने दोनों स्थलों को प्रसाद योजना में शामिल करने के विषय पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा। उनकी पहल ने सिरपुर और राजिम के महत्व को एक बार फिर राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में लाकर खड़ा कर दिया है। सांसद ने चार बिंदुवार प्रश्न रखते हुए कहा कि क्या सरकार छत्तीसगढ़ के महत्वपूर्ण तीर्थ एवं सांस्कृतिक-धार्मिक महत्व वाले स्थलों सिरपुर और राजिम को प्रसाद योजना में शामिल करने पर विचार कर रही है? यदि हाँ, तो इन स्थलों के चयन, मूल्यांकन एवं स्वीकृति हेतु निर्धारित मानदंड और प्रक्रिया क्या है? सिरपुर और राजिम में अवसंरचना विकास, पर्यटक सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण, तथा सांस्कृतिक-आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण के लिए अब तक क्या कदम प्रस्तावित या क्रियाशील हैं? क्या इन दोनों स्थलों के संबंध में छत्तीसगढ़ सरकार या स्थानीय प्रशासन द्वारा कोई डीपीआर या औपचारिक अनुरोध भेजा गया है? यदि भेजा गया है, तो उसकी वर्तमान स्थिति क्या है? इसके जवाब में केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने स्पष्ट किया कि प्रसाद योजना के अंतर्गत चयन की प्रक्रिया निर्धारित नियमों और प्राप्त प्रस्तावों के अनुसार की जाती है। इस योजना को 10 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं, इसलिए केंद्र सरकार इसके समीक्षात्मक सुधार और संभावित पुनर्गठन पर विचार कर रही है। मंत्री के अनुसार, इस योजना का एक नया, अधिक प्रभावी और विस्तारित रूप भविष्य में सामने आ सकता है, जो देशभर के प्रमुख तीर्थस्थलों के समग्र विकास को नई दिशा देगा।