पिछड़ों के उत्थान के लिए समर्पित रहा मिनीमाता का जीवन
महासमुंद। कांग्रेस भवन में पूर्व सांसद मिनीमाता की पुण्यतिथि मनाई गई। भारत के सामाजिक एवं राजनीतिक इतिहास में स्व. पूर्व सांसद मिनीमाता अगमदास का नाम आदर और सम्मान के साथ लिया जाता है। वे न केवल एक जननेता थीं, बल्कि समाज सुधार, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और दलित उत्थान की अग्रणी प्रहरी भी रहीं। उनका सम्पूर्ण जीवन समाज के वंचित, शोषित एवं पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित रहा। बचपन से ही उन्होंने शिक्षा के महत्व को समझा और अपने जीवन में सेवा एवं संघर्ष को प्राथमिकता दी। वे समाज के पुनर्गठन, शिक्षा प्रसार, छुआछूत उन्मूलन और महिला अधिकारों की आवाज बुलंद करने के लिए जानी जाती हैं। राजनीतिक जीवन में मिनीमाता ने लोकसभा का प्रतिनिधित्व करते हुए जनता की समस्याओं को मुखरता से उठाया। वे संसद की उन चुनिंदा महिला सांसदों में से थीं, जिन्होंने न केवल क्षेत्रीय मुद्दों को बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी सामाजिक न्याय, भूमि सुधार, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर ठोस पहल की। मिनीमाता ने अपने राजनीतिक कार्यकाल के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक योगदान दिया। उन्होंने महिला शिक्षा के प्रसार के लिए विद्यालयों की स्थापना, छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए प्रयास, तथा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वावलंबन के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों की शुरूआत की। उनके योगदान को स्मरण कर उनके आदशों और सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाया जाए। इस मौके पर खिलावन बघेल शहर अध्यक्ष, निखिलकांत साहू नपा अध्यक्ष, आलोक चंद्राकर पूर्व बोर्ड उपाध्यक्ष छत्तीसगढ़ शासन, ढेलू निषाद ग्रामीण अध्यक्ष, संजय शर्मा पूर्व प्रभारी महामंत्री, लक्ष्मी देवांगन पूर्व सदस्य छत्तीसगढ़ शासन, हीरा बंजारे पूर्व मंडी अध्यक्ष, वरिष्ठ कांग्रेसी राजेंद्र चंद्राकर, गौरव चंद्राकर महामंत्री, गुरमीत चावला प्रभारी महामंत्री, शाहबाज राजवानी मौजूद थे।
