12 साल की भाजपा सरकार में महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ी : आलोक चंद्राकर

कांग्रेस नेता ने मोदी सरकार को घेरा, बोले- आय सीमित, खर्च दोगुना; महंगाई ने छीनी त्योहारों की खुशियां
महासमुंद। दीपावली जैसे बड़े त्योहार पर भी आम आदमी की रसोई का बजट राहत के बजाय महंगाई की मार से बिगड़ रहा है। खाद्य सामग्री से लेकर घरेलू गैस तक की बढ़ती कीमतों ने गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कांग्रेस प्रदेश संयुक्त महासचिव एवं जीव-जंतु कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष आलोक चंद्राकर ने इसके लिए केंद्र की मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों और महंगाई पर नियंत्रण में विफलता को जिम्मेदार ठहराते हुए तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने सत्ता में आने के 100 दिन के भीतर महंगाई कम करने का वादा किया था, लेकिन 12 साल के शासन में आम आदमी को राहत देने के बजाय महंगाई का बोझ कई गुना बढ़ा दिया गया।
चंद्राकर ने कहा कि आम आदमी की आय सीमित है, लेकिन रोजमर्रा की जरूरतों पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ रहा है। आय में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई, जबकि खाद्य सामग्री, रसोई गैस और दूसरी जरूरी वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं। इसका सीधा असर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की बचत पर पड़ रहा है। अब लोगों के सामने त्योहार मनाने और घर का खर्च चलाने के बीच संतुलन बनाने की चुनौती खड़ी हो गई है।
400 रुपये के सिलेंडर पर हंगामा, अब 1050 पर चुप्पी
घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों को लेकर भाजपा के पुराने विरोध को याद दिलाते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से पहले जब सिलेंडर करीब 400 रुपये का था, तब भाजपा के नेता इसे महंगाई बताकर सड़कों पर उतरते थे। तत्कालीन भाजपा नेता स्मृति ईरानी भी सिलेंडर लेकर विरोध प्रदर्शन करती थीं। लेकिन आज भाजपा शासन में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत करीब 1050 रुपये तक पहुंचने के बावजूद पार्टी के नेता मौन हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जो कीमत कभी भाजपा को असहनीय लगती थी, वही आज उसके शासन में सामान्य कैसे हो गई? कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी ने भी आम उपभोक्ताओं और कारोबारियों की परेशानी बढ़ाई है। यह भाजपा की महंगाई विरोधी राजनीति और सत्ता में आने के बाद उसके बदले हुए रवैये को उजागर करता है।
6 हजार का राशन अब 10 हजार में भी मुश्किल
आलोक चंद्राकर ने दावा किया कि खाद्य सामग्रियों की कीमतों में पिछले कुछ समय में 20 से 40 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। दो महीने पहले तक करीब 6 हजार रुपये में मिलने वाला महीनेभर का राशन अब 8 से 10 हजार रुपये खर्च करने के बाद भी मुश्किल से पूरा हो रहा है। चावल की कीमत 50 रुपये से बढ़कर 80 से 90 रुपये किलो, दाल 120 से बढ़कर 150 रुपये किलो और शक्कर 45 से बढ़कर करीब 60 रुपये किलो तक पहुंचने का दावा उन्होंने किया। इसी तरह सोयाबीन तेल का 15 लीटर का टिन, जो पहले 2,000 से 2,100 रुपये में मिलता था, अब करीब 2,600 रुपये में बिक रहा है।
महंगाई ने त्योहारों का बजट भी छीना
उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष दीपावली के दौरान बाजार में बचत उत्सव की चर्चा थी, लेकिन इस बार महंगाई ने लोगों की बचत की गुंजाइश ही खत्म कर दी है। नए कपड़े, मिठाई, घर की सजावट और त्योहार की खरीदारी के लिए अलग से पैसे निकालना मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए मुश्किल होता जा रहा है। रसोई का खर्च निकालने के बाद त्योहार की खुशियों के लिए जेब में बहुत कम बचता है।
चंद्राकर ने कहा कि भाजपा ने महंगाई कम करने के नाम पर जनता से वोट मांगे थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद अपने ही वादों को भुला दिया। सरकार को आम आदमी की आर्थिक परेशानियों से कोई सरोकार नहीं रह गया है। उन्होंने केंद्र सरकार से महंगाई पर प्रभावी नियंत्रण करने और घरेलू गैस सहित आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों में राहत देने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।