रसोइया संघ की प्रदेशाध्यक्ष समेत पदाधिकारियों को हिरासत में लेने का आरोप

चार माह के बकाया वेतन और मध्याह्न भोजन सामग्री के भुगतान की मांग को लेकर चल रहा था आंदोलन, कांग्रेस ने थाने में दिया धरना
महासमुंद। चार माह के बकाया वेतन, मध्याह्न भोजन सामग्री के लंबित भुगतान समेत विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहीं रसोइया संघ की प्रदेशाध्यक्ष नीलू ओगरे सहित प्रमुख पदाधिकारियों को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने का मामला सामने आया है। संघ और कांग्रेस नेताओं ने पुलिस कार्रवाई का विरोध करते हुए इसे महिलाओं के शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने का प्रयास बताया। कार्रवाई की सूचना मिलते ही कांग्रेस की पूर्व जिलाध्यक्ष एवं वर्ष 2023 की महासमुंद विधानसभा प्रत्याशी डॉ. रश्मि चंद्राकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ महासमुंद थाने पहुंचीं और कार्रवाई के विरोध में थाने में ही धरना शुरू कर दिया।
रसोइया संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, संघ की प्रदेशाध्यक्ष नीलू ओगरे और अन्य पदाधिकारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से धरने पर बैठी थीं। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर महासमुंद थाने पहुंचाया। वहीं संघ से जुड़े करीब 50 से 60 सहयोगियों को घोड़ारी में ही हाउस अरेस्ट किए जाने का आरोप लगाया गया है।
हड़ताल खत्म करने के लिखित आश्वासन का आरोप
संघ पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारियों ने महिलाओं पर दबाव बनाते हुए हड़ताल समाप्त करने का लिखित आश्वासन देने की बात कही। इस कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद डॉ. रश्मि चंद्राकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ महासमुंद थाने पहुंचीं और उन्होंने रसोइया महिलाओं को हिरासत में लिए जाने का विरोध किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने थाने के भीतर ही धरना शुरू कर दिया।
डॉ. रश्मि चंद्राकर ने कहा कि रसोइया बहनें पिछले चार माह से वेतन नहीं मिलने के बावजूद काम करने को मजबूर हैं। मध्याह्न भोजन सामग्री का भुगतान लंबित होने से भी उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा है। उन्होंने कहा कि अपनी मेहनत की कमाई और बच्चों के निवाले के हक के लिए आवाज उठाना अपराध नहीं है। महिलाओं पर दबाव बनाकर आंदोलन समाप्त कराने का प्रयास उचित नहीं है। कांग्रेस पार्टी रसोइया संघ की मांगों के साथ खड़ी है।
विरोध के बाद रिहाई
कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के थाने में धरना देने के बाद मामला गरमा गया। इसके बाद पुलिस ने रसोइया संघ की प्रदेशाध्यक्ष नीलू ओगरे समेत हिरासत में लिए गए पदाधिकारियों को रिहा कर दिया। घोड़ारी में हाउस अरेस्ट किए गए रसोइया संघ से जुड़े लोगों को भी रिहा किए जाने की जानकारी सामने आई है।
रिहाई के बाद कांग्रेस नेताओं और रसोइया संघ के पदाधिकारियों ने इसे अपने आंदोलन की जीत बताया। डॉ. रश्मि चंद्राकर ने कहा कि यदि जल्द ही रसोइया बहनों के लंबित वेतन और मध्याह्न भोजन सामग्री के बकाया भुगतान का निराकरण नहीं किया गया तो कांग्रेस पार्टी उनके साथ आंदोलन को आगे बढ़ाएगी।
धरने और विरोध प्रदर्शन के दौरान जिला महामंत्री भरत ठाकुर, जिला महामंत्री सोमेश दवे, जिला कांग्रेस पदाधिकारी प्रदीप चंद्राकर, शहर महामंत्री निर्मल जैन, पार्षद मुस्ताक खान विक्की, नितेंद्र बैनर्जी, तबरेज खान, सचिन गायकवाड़, राजू साहू, बिट्टू साहू सहित कांग्रेस के अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।