अस्पताल में गूंज रही नन्हीं चहचहाहट, खल्लारी पीएचसी में दुर्लभ ‘दूधराज’ ने बसाया आशियाना
मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों के बीच आकर्षण का केंद्र बना एशियन पैराडाइज फ्लाईकैचर का परिवार, नर-मादा मिलकर कर रहे बच्चों की परवरिश; संरक्षण की उठी मांग
महासमुंद। जहाँ अस्पतालों में आमतौर पर मरीजों की आवाजाही, दवाइयों की हलचल और उपचार की व्यस्तता दिखाई देती है, वहीं खल्लारी के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) परिसर में इन दिनों प्रकृति ने अपनी अनमोल छटा बिखेर दी है। अस्पताल परिसर के एक पेड़ पर मध्य प्रदेश के राजकीय पक्षी ‘दूधराज’ (एशियन पैराडाइज फ्लाईकैचर) ने अपना आशियाना बसाया है। घोंसले में नन्हे बच्चों की चहचहाहट और माता-पिता की अथक परवरिश का यह दृश्य हर आने-जाने वाले का मन मोह लेता है।
कुछ समय पहले इस दुर्लभ पक्षी के जोड़े ने अस्पताल परिसर के एक पेड़ को अपना बसेरा बनाया था। अब घोंसले में उनके नन्हे बच्चे भी हैं। सुबह से शाम तक नर और मादा दोनों बारी-बारी से कीड़े-मकोड़े पकड़कर लाते हैं और बड़े स्नेह से अपने बच्चों को खिलाते हैं। यह पूरा दृश्य मानो प्रकृति का जीवंत पाठ पढ़ा रहा हो।
घोंसला पेड़ की ऊँची टहनियों के बीच बेहद सलीके से बनाया गया है। सफेद-काले रंग और लंबी रेशमी पूंछ वाला नर दूधराज अपनी मनमोहक उड़ान से लोगों का ध्यान खींचता है, जबकि भूरे रंग की मादा लगातार बच्चों की सुरक्षा और देखभाल में लगी रहती है। अस्पताल आने वाले मरीज, उनके परिजन और स्वास्थ्यकर्मी भी कुछ पल ठहरकर इस दुर्लभ नजारे का आनंद लेते हैं। कई लोग इसे अपने मोबाइल कैमरों में भी कैद कर रहे हैं।
खल्लारी के सामाजिक कार्यकर्ता एवं उपसरपंच तारेश साहू ने कहा कि अस्पताल परिसर में इस दुर्लभ पक्षी का सुरक्षित घोंसला बनाना पूरे क्षेत्र के लिए गौरव की बात है। उन्होंने बताया कि पक्षियों के संरक्षण और घोंसले की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शासन-प्रशासन को पत्र भेजा जाएगा, ताकि इस प्राकृतिक धरोहर को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे।
प्रकृति का सकारात्मक संदेश
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार एशियन पैराडाइज फ्लाईकैचर, जिसे स्थानीय भाषा में दूधराज या सुल्ताना बुलबुल भी कहा जाता है, अत्यंत शर्मीला और दुर्लभ कीटभक्षी पक्षी है। यह प्रायः घने जंगलों, हरियाली और प्रदूषण रहित शांत वातावरण में ही अपना बसेरा बनाता है। ऐसे में खल्लारी के व्यस्त स्वास्थ्य केंद्र परिसर में इसका घोंसला बनाना इस बात का संकेत है कि यहाँ का वातावरण अब भी जैव विविधता के लिए अनुकूल और सुरक्षित है।
भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच खल्लारी पीएचसी का यह छोटा-सा पेड़ आज इंसानों और प्रकृति के सुंदर सह-अस्तित्व की मिसाल बन गया है। नन्हे दूधराज की चहचहाहट मानो हर आने वाले को यह संदेश दे रही है कि यदि प्रकृति को सुरक्षा और अपनापन मिले, तो वह सबसे व्यस्त स्थानों को भी जीवन और उल्लास से भर देती है।
