कृषि विभाग ने कमीशन के लिए अनुपयोगी सामग्री की खरीदी : विनोद
सामान में कमीशन के अलावा, किसानों से नगद, एलआरपी भुगतान की राशि भी ले रहे वापस
महासमुंद। पूर्व संसदीय सचिव विनोद सेवन लाल चंद्राकर ने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा की गई सुशासन के हर दावे का पोल सरकारी अधिकारियों के भ्रष्ट आचरण से खुल रहा है। पूरे प्रदेश सहित महासमुंद जिले में कृषि विभाग के कई कारनामे सामने आ रहे हैं।
महासमुंद कृषि विभाग का एक और भ्रष्टाचार एल.आर.पी. से भी ऑनलाइन रूपये लिये जाने की शिकायत आ रही है। इससे प्रशासनिक शून्यता स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रही है। जिले के प्रायः प्रत्येक विभागों में भ्रष्टाचार चरम पर है। आम जनता की फरियाद अधिकारी तवज्जों नहीं दे रहे है, कृषि विभाग महासमुंद में किये गये भ्रष्टाचार की पोल परत दर परत खुल रही है। किसानों के साथ विभाग द्वारा घोर अन्याय किया जा रहा है। यहां तक कि संचालक कृषि विभाग के आदेशों को भी धता बताकर उप संचालक द्वारा मनमाने तरीके से नियम प्रक्रिया को दरकिनार करते हुये चहेते ठेकेदारों से सामग्री क्रय की जा रही हैं, जो किसानों के उपयोग के है ही नहीं। यहां तक की वितरण भी नहीं किया गया है। श्री चंद्राकर ने का कि परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत कलस्टर का चयन किया जाता है, एक कलस्टर में एक एल.आर.पी. को देखरेख एवं योजना के संबंध में किसानों को अवगत कराने के लिये विभाग द्वारा रखा जाता है। जिसे एक वित्तीय वर्ष में राशि 50 हजार रूपये एकमुश्त दिया जाता है। जिससे ये सालभर इसी राशि को योजनाओं के क्रियान्वयन में व्यय करते हैं। उप संचालक कृषि महासमुंद के कार्यालय में इस योजना के शाखा प्रभारी एवं आत्मा योजना के ऑपरेटर वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी बागबाहरा में पदस्थ द्वारा एल.आर.पी. से भुगतान किये गये राशि को वापस ले लिया जाता है। यह विभाग इतना भ्रष्टाचार में बेखौफ होकर खुलेआम एल. आर.पी. ऑनलाइन, चेक के माध्यम से अपने खातों में राशि हस्तांतरण करवाने से भी नहीं डरते। ऑनलाइन राशि हस्तांतरण के स्क्रीनशॉट इस बात को बयां कर रहे हैं। साथ ही नगद राशि जो ले लेते हैं, ओ अलग।
पूर्व विधायक ने कहा कि सामान क्रय करने के बदले में ठेकेदारों से मिलने वाले कमीशन राशि से भी संतुष्ट न होकर एल.आर.पी. से भी राशि वसूली जा रही है। इनके बैंक खातों की भी जांच किया जाना चाहिये।
उन्होंने कहा कि परंपरागत कृषि विकास योजना के शाखा प्रभारी को उप संचालक कृषि महासमुंद द्वारा इसी काम के लिये ही अन्यत्र पदस्थापना होते हुये भी कार्यालय, उप संचालक कृषि महासमुंद में ही संलग्न किया गया है। जिले के कृषकों द्वारा शाखा प्रभारी को शाखा से हटाकर मूल पदस्थापना में भेजे जाने की मांग की जा रही है। पूर्व विधायक चंद्राकर द्वारा प्रमुख सचिव एवं कृषि उत्पादन आयुक्त, छत्तीसगढ़ शासन एवं कलेक्टर महासमुंद को पत्र के माध्यम से किसानों की पीड़ा से अवगत करवाते हुये उक्त शाखा प्रभारी का संलग्नीकरण अविलंब समाप्त किये जाने की मांग की गई है। साथ ही साथ जांच कर भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारी, कर्मचारियों के विरूध्द आवश्यक कार्यवाही किये जाने की मांग की गई है।
