रात में भी गर्मी का एहसास, न्यूनतम तापमान सामान्य से 2 डिग्री ज्यादा
महासमुंद। तेज गर्मी का एहसास अब धीरे धीरे बढ़ने लगा है। दिन भर गर्म हवाओं के थपेड़े से लू जैसे हालात हैं। यही नहीं दिन के अलावा अब रात में भी गर्मी महसूस होने लगी हैं। तापमान 40 डिग्री तक पहुँच गया है वहीं न्यूनतम तापमान भी सामान्य से 2 डिग्री अधिक यानि 26 डिग्री पर पहुंच चुका है। जिसका सीधा असर अब लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
बता दें कि 40 डिग्री से अधिक तापमान होने पर हीटवेव के हालात निर्मित होते हैं। हालांकि अभी जिले में हीटवेव जैसे हालात नहीं हुई है, लेकिन आने वाले दिनों में हीटवेव का सीधा असर लोगों की सेहत पर भी पड़ने वाला है। बढ़ती गर्मी से आलम यह है कि जिले में वायरल के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। अस्पताल पहुंचने वाला हर पांचवा मरीज वायरल के संक्रमण से ग्रसित है। डॉक्टरों का कहना है कि अभी हीटवेव के मामले सामने नहीं आ रहे हैं, लेकिन आगे गर्मी और बढ़ने पर लोगों को गंभीर शिकायतें हो सकती है। ऐसे में सावधानी बरतना जरूरी हो गया है। दूसरी ओर बच्चे 40 डिग्री तापमान में स्कूल आना-जाना कर रहे हैं। ऐसे में बढ़ती गर्मी को देखते हुए अब स्कूलों में छुट्टी की मांग बढ़ने लगी है। ज्ञात हो कि सामान्य तौर पर जब तापमान सामान्य से 4.5 डिग्री से 6.4 डिग्री अधिक हो जाता है, तो हीटवेव की घोषणा की जाती है। यदि तापमान सामान्य से 6.4 से अधिक दर्ज किया जाता है, तो यह गंभीर हो जाता है।
बच्चे-बुजुर्गों के अलावा बीमार पर इसका सीधा असर पड़ता है। भीषण गर्मी से डिहाइड्रेशन यानि शरीर में पानी की कमी होने लगती है। जिसका खतरा बच्चों, बुजुर्गों और शुगर पेशेंट्स को ज्यादा होता है। डायबिटिक्स को तो बार-बार यूरिन के चलते डिहाइड्रेट होने का डर रहता है। इस मौसम में कम पानी पीने वालों को यूरिन इंफेक्शन का खतरा अधिक होता है। पानी कम पीने से बैक्टीरिया शरीर से बाहर नहीं निकल पाते और इंफेक्शन की वजह बनते हैं। चिकित्सकों के अनुसार अत्याधिक गर्मी के संपर्क में रहने से पेशाब में जलन, तेज बुखार और सर्दी, चक्कर आना जैसी समस्याएं हो सकती है। गंभीर मामलों में हीट स्ट्रोक के कारण सिरदर्द, सांस लेने में कठिनाई, भ्रम और जानलेवा समस्याएं भी हो सकती है। ऐसे में लोगों को पर्याप्त पानी पीना, ठंडी जगह पर रहना और ढीले-ढाले कपड़े पहनने जैसी सावधानियां बरतनी चाहिए। अधिक गर्मी के कारण शरीर दर्द, बेहोश, तेज बुखार जैसी हालत में तुरंत अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए।
बेजुबान मवेशियों और पंछियों की हालत खराब
पिछले तीन -चार दिनों से झुलसा देने वाली गर्मी पड़ रही है। यहां तक कि घर की दीवार और आंगन भी भट्ठी की तरह तपने लगे हैं। हर कोई बेचैन हैं। तकलीफ तो उन बेजुबान मवेशियों को हो रही है, जिन्हें इस भीषण गर्मी में चारा – पानी के लिए यहां-वहां भटकना पड़ रहा है। पक्षियों की भी यही हाल है। चहचहाने की आवाज सुनाई नहीं पड़ रही है। हालांकि बेजुबान मवेशियों और पंछियों को दाना- पानी उपलब्ध कराने के लिए कुछ लोगों और कुछ संस्थाओं द्वारा व्यवस्था तो की जा रही है पर वह काफी नहीं है।
