गर्मी से घटने लगा कोडार बांध का जलस्तर
मात्र साढ़े 10 फीट पानी शेष, 18 गांवों के तालाबों को भरने छोड़ा गया है पानी
महासमुंद। गर्मी की शुरूआत में ही जिले के सबसे बडे शहीद वीर नारायण सिंह जलाशय (कोडार) सूखने लगा है। आज की तारीख में कोडार जलाशय में मात्र साढ़े 10 फीट पानी ही शेष है। यह पिछले दो साल में कोडार बांध में सबसे कम पानी है। इधर, मंगलवार से आरबीसी नहर से 18 गांवों के तालाबों को भरने के लिए पानी छोड़ा गया है और जल्द ही एलबीसी नहर के तहत आने वाले 29 गांवों के तालाबों को भरने के लिए पानी छोड़ा जाएगा। जिससे ग्रामीणों को निस्तारी की समस्या न हो।
बता दें कि प्रदेश सहित जिले में गर्मी लगातार बढ़ रही है अभी से तापमान 38 से 39 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच रहा है। पिछले साल मध्यम बारिश के कारण कोडार में जलभराव नहीं हो पाया था। साथ ही खरीफ फसल धान के लिए कोडार से लगातार पानी छोड़ा गया जिसके चलते गर्मी आते-आते यहां अब मात्र साढ़े 10 फीट जलभराव रह गया है। हालांकि पानी कम होने से ग्रीष्मकालीन धान फसल के लिए पानी नहीं छोड़ा गया है। पर, हर साल की तरह इस साल भी आरबीसी और एलबीसी नहर से लगभग 50 गांवो में तालाबों को भरने के लिए मंगलवार से पानी छोड़ने की शुरूआत हो गयी है। मंगलवार को आरबीसी नहर के माध्यम से तुमगांव,मालीडीह, पिरदा, बेंदरीडीह, खैरझिटी, गुडरूडीह, परसाडीह, भोरिंग, तेंदूवाही, कुकराडीह, जोबा, गढ़सिवनी, कौवाझर, गोपालपुर अमावस, बेलटुकरी, अछोली, अछोला को 35 क्यूसेक पानी देने की शुरूआत हुई है, जिसे आने वाले दिनों में बढाकर 50-60 क्यूसेक कर दिया जाएगा।
एलबीसी से 29 गांवो को तालाब भरने के लिए दिया जाएगा पानी
जानकारी के अनुसार मंगलवार से आरबीसी से 18 गांवों को रबी फसल के लिए पानी दिया जा रहा है। जल्द ही एलबीसी के 29 बनसिवनी, सोरिद, कौंदकेरा, नवापारा, परसदा, चोरभट्टी, बेमचा, मुस्की, कांपा, खट्टीडीह, खरोरा, बेलसोंडा, घोड़ारी, बरबसपुर, बड़गांव, बिरकोनी, अछरीडीह, मुढ़ैना, नांदगांव, साराडीह, बरोंडाबाजार, परसट्टी, बम्हनी, मचेवा, भलेसर, परसकोल, लाफिनकला, लाफिनखुर्द और चिंगरौद को निस्तारी के लिए पानी दिया जाएगा।
दो माह में 1.6 फीट पानी का हुआ वाष्पीकरण
जानकारी के अनुसार कोडार बांध में 31 जनवरी 2025 को 12.10 फीट पानी था । तब से लेकर आज 2 अप्रैल यानि दो माह में न तो रबी फसल के लिए कोडार से पानी दिया गया और न ही निस्तारी के लिए पानी छोड़ा गया। दो महीनों में ही लगभग 1.60 फीट पानी का वाष्पीकरण (भाप बनकर उड़ गया) हो गया जिसके बाद अब कोडार में साढ़े 10 फीट पानी ही शेष है।
