कैशलेस उपचार योजना धरातल पर फ्लॉप: आलोक
दुर्घटना पीड़ितों को 1.50 लाख रुपए तक निशुल्क इलाज का प्रावधान, अस्पतालों में जानकारी तक नहीं; नोडल अधिकारी नियुक्त कर सख्त मॉनिटरिंग की मांग
महासमुंद। सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए केंद्र व राज्य सरकार द्वारा संचालित 1.50 लाख रुपए तक की कैशलेस उपचार योजना को लेकर छत्तीसगढ़ जीव-जंतु कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष एवं कांग्रेस के प्रदेश संयुक्त महामंत्री आलोक चंद्राकर ने साय सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के दावों के बावजूद योजना का लाभ दुर्घटना पीड़ितों को जमीनी स्तर पर नहीं मिल पा रहा है और व्यवस्था पूरी तरह निष्क्रिय नजर आ रही है।
चंद्राकर ने कहा कि योजना का उद्देश्य सड़क हादसे के बाद पीड़ित को तत्काल निशुल्क उपचार उपलब्ध कराकर उसकी जान बचाना है, लेकिन प्रदेश के कई निजी एवं सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलेस उपचार के लिए पीड़ितों को परेशान किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई जगह कागजी प्रक्रिया के नाम पर देरी की जाती है, जिससे गंभीर मरीजों की स्थिति और बिगड़ सकती है।
सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था पर भी सवाल
कांग्रेस नेता ने सरकारी अस्पतालों में भी आवश्यक जीवन रक्षक दवाओं और इमरजेंसी मेडिकल किट की कमी का आरोप लगाया। उनका कहना है कि सरकार ने योजना लागू कर दी, लेकिन इसकी प्रभावी निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की गई। इससे जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को समय पर उपचार मिलने में परेशानी हो रही है।
योजना के प्रचार-प्रसार पर उठाए सवाल
चंद्राकर ने महासमुंद जिले का उदाहरण देते हुए कहा कि अनेक निजी और सरकारी अस्पतालों में योजना से संबंधित बोर्ड, बैनर या फ्लेक्स तक प्रदर्शित नहीं किए गए हैं। जानकारी के अभाव में दुर्घटना पीड़ितों के परिजन योजना का लाभ लेने के बजाय इलाज का खर्च स्वयं वहन करने को मजबूर हो सकते हैं।
उन्होंने सरकार से मांग की कि सभी अस्पतालों में योजना की जानकारी प्रमुखता से प्रदर्शित करना अनिवार्य किया जाए, कैशलेस उपचार से इनकार या लापरवाही बरतने वाले अस्पतालों पर कार्रवाई हो तथा योजना की निगरानी के लिए जिला स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटना के बाद पीड़ित को इलाज के लिए आर्थिक संकट में नहीं पड़ना चाहिए और समय पर उपचार मिलना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
