मूल्य आधारित शिक्षा से ही होगा बच्चों में संस्कारों का विकास : बीके चंद्रकला दीदी

ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के शिक्षाविद प्रभाग ने किया शिक्षक सम्मान समारोह, विधायक रहे मुख्य अतिथि
महासमुंद। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के शिक्षाविद प्रभाग द्वारा शिक्षक सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा शामिल हुए। वहीं वृंदावन स्कूल की डायरेक्टर सुजाता विश्वनाथन, रायपुर से पधारी मुख्य वक्ता बीके चंद्रकला दीदी, सेवाकेंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी प्रीति दीदी सहित विभिन्न स्कूल-कॉलेजों के शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं प्रभु स्मृति के साथ की गई। सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया। कार्यक्रम का संचालन बीके दोमेश्वरी दीदी ने किया।
शिक्षा में आध्यात्मिकता का समावेश जरूरी
मुख्य वक्ता बीके चंद्रकला दीदी ने विश्व नवनिर्माण के लिए मूल्य आधारित शिक्षा की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब तक शिक्षा में आध्यात्मिकता का समावेश नहीं होगा, तब तक बच्चों में अच्छे संस्कारों का जागरण संभव नहीं है। उन्होंने शिक्षकों के लिए मूल्यों की महत्ता बताते हुए कहा कि शिक्षक स्वयं जिन मूल्यों को धारण करेंगे, बच्चे भी उन्हें देखकर सहज रूप से अपनाएंगे।
उन्होंने कहा कि शिक्षक को अपने आचरण में प्रेम और अनुशासन के बीच संतुलन बनाए रखना चाहिए। उन्होंने शिक्षकों को सदा सकारात्मक सोच, क्षमा, आत्मबल और मौन-साधना जैसे गुणों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि पहले शिक्षक स्वयं ‘साइलेंस’ का अभ्यास करेंगे, तभी बच्चे भी सहज रूप से शांत और एकाग्र रहना सीखेंगे।
किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर शिक्षक बनें प्रेरणास्रोत
वृंदावन स्कूल की डायरेक्टर सुजाता विश्वनाथन ने कहा कि शिक्षकों का दायित्व केवल बच्चों को किताबी ज्ञान देना नहीं है, बल्कि उनके व्यक्तित्व और चरित्र का निर्माण करना भी है। शिक्षक जब अपने आचरण से बच्चों के लिए प्रेरणास्रोत बनेंगे, तभी सही मायने में शिक्षक दिवस मनाने का उद्देश्य सार्थक होगा।
परमात्मा ही सच्चा शिक्षक : प्रीति दीदी
सेवाकेंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी प्रीति दीदी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि सच्चा शिक्षक परमपिता परमात्मा है। राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर अच्छे संस्कारों और सकारात्मक गुणों का विकास कर सकता है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक मूल्यों को जीवन में अपनाकर समाज में अच्छे शिक्षक और अच्छे विद्यार्थी का उदाहरण प्रस्तुत किया जा सकता है। कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों एवं उपस्थित शिक्षकों को प्रसाद तथा ईश्वरीय सौगात भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक- शिक्षिकाओं की सहभागिता रही।