नीट पेपर लीक मामले में छात्रों पर लाठीचार्ज लोकतंत्र पर हमला : आलोक
एफआईआर वापस लेने, न्यायिक जांच, घायल छात्रों को मुआवजा और दोषियों पर कार्रवाई की उठाई मांग
महासमुंद। छत्तीसगढ़ जीव-जंतु कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष एवं कांग्रेस के प्रदेश संयुक्त महामंत्री आलोक चंद्राकर ने नीट पेपर लीक मामले को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं पर कथित लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले दागे जाने तथा उनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाने की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि यह घटना लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा हमला है और देश के युवाओं के भविष्य व उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचलने का प्रयास है।
जारी बयान में श्री चंद्राकर ने कहा कि लाखों छात्र-छात्राएं अपने भविष्य और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से न्याय की आवाज उठा रहे थे, लेकिन केंद्र सरकार ने संवाद के बजाय दमन का रास्ता अपनाया। उनका कहना था कि नीट पेपर लीक की घटना ने देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करोड़ों परिवारों ने अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए भारी आर्थिक बोझ उठाया, कोचिंग और शिक्षा पर बड़ी राशि खर्च की, लेकिन सरकारी लापरवाही के कारण उनकी मेहनत और उम्मीदों पर पानी फिर गया।
उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। ऐसे में छात्रों पर लाठीचार्ज करना और आंसू गैस के गोले छोड़ना यह दर्शाता है कि सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए छात्रों की आवाज दबाना चाहती है।
श्री चंद्राकर ने छात्र-छात्राओं के खिलाफ दर्ज एफआईआर को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि पीड़ितों को ही आरोपी बनाया जाना तानाशाही मानसिकता का परिचायक है। उन्होंने मांग की कि छात्रों पर दर्ज सभी प्रकरण तत्काल वापस लिए जाएं, घायल छात्रों को समुचित इलाज और मुआवजा दिया जाए तथा पूरे घटनाक्रम की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए।
उन्होंने कहा कि जब छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है तो इसकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। शिक्षा जैसी संवेदनशील व्यवस्था में लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित पदाधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों के सपनों से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए और न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा।
