अफवाहों पर न दें ध्यान, जिले में पेट्रोल-डीजल पर्याप्त : कलेक्टर

पैनिक खरीदारी से बढ़ी मांग, प्रशासन ने तय की ईंधन वितरण सीमा
महासमुंद। जिले में पेट्रोल एवं डीजल की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था को लेकर कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने पेट्रोल-डीजल वितरकों एवं ऑयल कंपनियों के विक्रय अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली। बैठक में जिले में ईंधन की वर्तमान स्थिति, आपूर्ति व्यवस्था तथा बढ़ती मांग पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में पेट्रोल पंप संचालकों ने बताया कि पेट्रोल-डीजल की कमी को लेकर फैली अफवाहों और भ्रम के कारण अचानक मांग में तेजी आई है। सामान्य दिनों में 100 से 200 रुपये का पेट्रोल भरवाने वाले लोग अब टैंक फुल कराने पहुंच रहे हैं। इसके चलते कुछ पंपों पर अस्थायी रूप से ईंधन समाप्त होने जैसी स्थिति बनने पर आसपास के पेट्रोल पंपों में भी भीड़ बढ़ रही है।
ऑयल कंपनियों के विक्रय अधिकारियों ने जानकारी दी कि जिले में वर्तमान में लगभग 7 लाख 18 हजार लीटर पेट्रोल तथा 7 लाख 33 हजार लीटर डीजल उपलब्ध है। यह मात्रा जिले की औसत दैनिक खपत के अनुसार पेट्रोल के लिए करीब 5 दिन और डीजल के लिए लगभग 2 दिन तक पर्याप्त है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ऑयल कंपनियों द्वारा लगातार ईंधन की आपूर्ति की जा रही है और यदि लोग अनावश्यक रूप से पैनिक खरीदारी नहीं करेंगे तो स्थिति पूरी तरह सामान्य बनी रहेगी।
कलेक्टर ने आम नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि पेट्रोल-डीजल की कमी संबंधी अफवाहों पर ध्यान न दें और आवश्यकता से अधिक ईंधन का भंडारण न करें। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर ही ईंधन प्राप्त करें, ताकि सभी उपभोक्ताओं को सुचारु रूप से पेट्रोल एवं डीजल उपलब्ध कराया जा सके।
बैठक में ईंधन वितरण को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए एक बार में सीमित मात्रा में ईंधन देने का निर्णय भी लिया गया। इसके तहत दुपहिया वाहनों में 200 रुपये तक, कारों में 1500 रुपये तक, ट्रक एवं बसों में 10 हजार रुपये तक तथा कृषि कार्यों में उपयोग होने वाले वाहनों के लिए जरिकेन में 2 हजार रुपये तक ईंधन दिए जाने का निर्णय लिया गया।
बैठक में अपर कलेक्टर रवि कुमार साहू, डिप्टी कलेक्टर एवं प्रभारी खाद्य अधिकारी तेजपाल ध्रुव, सहायक खाद्य अधिकारी तरुण नायक, ऑयल कंपनियों के विक्रय अधिकारी तथा जिले के पेट्रोल-डीजल पंप संचालक उपस्थित रहे।