जिला पंचायत में 15वें वित्त आयोग की राशि वितरण पर सवाल

कार्ययोजना स्वीकृति में अनियमितता, असमानता और पक्षपात के आरोप; निष्पक्ष जांच की मांग
महासमुंद। जिला पंचायत महासमुंद में 15वें वित्त आयोग वर्ष 2025-26 की कार्ययोजना स्वीकृति एवं राशि वितरण को लेकर गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। इस संबंध में एक जिला पंचायत सदस्य ने कलेक्टर महासमुंद एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को लिखित शिकायत सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
जिला पंचायत सदस्य जागेश्वर जुगनू चंद्राकर ने शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 02 मई 2025 को आयोजित सामान्य सभा में पारित कार्ययोजना में न तो समानता का पालन किया गया और न ही पंचायत राज अधिनियम के दिशा-निर्देशों का सही तरीके से अनुपालन किया गया। विभिन्न विकासखंडों एवं जनप्रतिनिधियों के बीच राशि का वितरण असंतुलित एवं पक्षपातपूर्ण तरीके से किए जाने की बात कही गई है।
ब्लॉकों में इस तरह हुआ राशि का वितरण
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले के पांच ब्लॉकों में कार्ययोजना राशि का वितरण इस प्रकार किया गया है। सरायपाली को 129.40 लाख, बागबाहरा को 110.18 लाख, पिथौरा को 108.40 लाख, महासमुंद को 97.00 लाख और बसना को 85.20 लाख रुपये दिया गया है।
शिकायतकर्ता श्री चंद्राकर ने विशेष रूप से पिथौरा ब्लॉक का उल्लेख करते हुए कहा है कि यह आदिवासी एवं पिछड़ा क्षेत्र है, जहां 50 प्रतिशत से अधिक जनजातीय आबादी निवास करती है, इसके बावजूद उसे अपेक्षित प्राथमिकता नहीं दी गई।
पक्षपात और पारदर्शिता की कमी के आरोप
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि जिला पंचायत अध्यक्ष एवं कुछ चुनिंदा सदस्यों को अधिक राशि आवंटित की गई, जबकि कई अन्य सदस्यों और पिछड़े क्षेत्रों की उपेक्षा की गई। साथ ही योजना वितरण में किसी प्रकार का पारदर्शी एवं समान मापदंड लागू नहीं किए जाने की बात कही गई है।
शिकायतकर्ता के अनुसार यह पूरी प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) एवं पंचायत राज अधिनियम की भावना के विपरीत है।
जांच और कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता श्री चंद्राकर ने प्रशासन से मांग की है कि, 2 मई 2025 की सामान्य सभा में पारित कार्ययोजना एवं आदेश की निष्पक्ष जांच कराई जाए। वित्तीय अनियमितताओं एवं वितरण प्रक्रिया की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए, वर्तमान कार्ययोजना को निरस्त कर समानता एवं न्याय के आधार पर नई योजना बनाई जाए, जांच पूरी होने तक संबंधित आदेश एवं कार्यों पर रोक लगाई जाए। शिकायतकर्ता ने चेतावनी दी है कि यदि समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो मामले को उच्च स्तर पर उठाया जाएगा।