टीईटी अनिवार्यता शिथिल करने की मांग तेज, शिक्षकों ने सौंपा ज्ञापन

वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर नई शर्त थोपना अन्यायपूर्ण
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार की उठी मांग
महासमुंद। टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता को शिथिल करने की मांग को लेकर फेडरेशन के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री एवं शिक्षामंत्री के नाम डिप्टी कलेक्टर आशीष कर्मा को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की गई है।
जिला अध्यक्ष ईश्वर चंद्राकर ने बताया कि सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के तहत अब सेवारत शिक्षकों के लिए भी टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है। इस फैसले से लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों में चिंता और असंतोष का माहौल है।
उन्होंने कहा कि 20 से 25 वर्षों तक शिक्षण कार्य कर चुके शिक्षकों से पुनः परीक्षा लेना उनके साथ अन्याय है। फेडरेशन का मानना है कि यह निर्णय व्यवहारिक नहीं है और इससे शिक्षकों का मनोबल प्रभावित होगा।
जिला संरक्षक बी.पी. मेश्राम ने कहा कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति के समय टीईटी जैसी कोई व्यवस्था लागू नहीं थी, उन पर अब इसे अनिवार्य करना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर कर शिक्षकों को राहत दिलाई जाए। ज्ञापन सौंपने के दौरान ब्लॉक अध्यक्ष प्रकाश बघेल, राजेश चंद्राकर, आत्माराम साहू, राजेश भालेराव, मुकेश बैस सहित बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे।