प्रधानमंत्री आवास योजना से बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर
विषम परिस्थितियों में धरमपाल को मिला अपना आशियाना
बलरामपुर, 25 फरवरी 2026/ दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जीवन केवल भौगोलिक कठिनाइयों से ही नहीं बल्कि असुरक्षा, संसाधनों की कमी और भविष्य की अनिश्चितताओं से घिरा संघर्ष है। ऐसे ही चुनौतीपूर्ण हालात में ग्राम पंचायत बादा निवासी नक्सल पीड़ित धरमपाल ने वर्षों तक कठिन जीवन व्यतीत किया। सीमित आय, जर्जर कच्चा मकान और परिवार की सुरक्षा की चिंता उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी थी।
धरमपाल बताते हैं कि उनके पिता स्वर्गीय रामसाय गांव के पटेल थे और कृषि कार्य से परिवार का पालन-पोषण करते थे। लेकिन माओवादी हिंसा में उनके पिता की हत्या के बाद परिवार की जीवन-धारा जैसे रुक सी गई। परिवार में उनकी माता, दो पुत्र एवं पांच पुत्रियों के सामने आजीविका और सुरक्षा की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई। पिता के असमय निधन ने पूरे परिवार को आर्थिक और मानसिक रूप से झकझोर दिया। इन विषम परिस्थितियों में धरमपाल किसी तरह मेहनत-मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। परिवार लंबे समय से मिट्टी और खपरैल से बने जर्जर मकान में निवास कर रहा था। लेकिन शासन की पहल से वर्ष 2024-25 में नक्सल पीड़ित परिवारों को मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें स्थायी आवास उपलब्ध कराने हेतु राहत दी गई। जिसमें धरमपाल का भी चयन प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत किया गया और उन्हें पक्का मकान स्वीकृत हुआ और अब धरमपाल का परिवार पक्के आवास में सुरक्षित जीवन जी रहा है। धरमपाल बताते हैं कि जहां पहले चिंता बनी रहती थी, वहीं अब पक्का घर मिलने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और वे बेहतर भविष्य की उम्मीद रखते हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आवास जैसी मूलभूत सुविधा से धरमपाल जैसे अन्य परिवारों को भी सुरक्षा मिली है, योजना के लिए धरमपाल ने शासन के प्रति आभार व्यक्त किया है।
