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उद्यमी बनने के लिए वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण

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वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण

युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल

रायपुर। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय भारत सरकार ने अनुमोदित एवं राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक द्वारा क्रियान्वित किए जा रहे प्रोजेक्ट के तहत छत्तीसगढ़ राज्य के युवाओं को निजी लिमिटेड कंपनी के पंजीकरण, औद्योगिक प्रयोजन हेतु औद्योगिक क्षेत्रों की भूमि, भवन-शेड आवंटन हेतु प्रक्रिया के लिए स्टैंडअप इंडिया स्कीम, मुद्रा लोन योजना, क्रेडिट गारंटी फण्ड स्कीम, एमएसएमईके अंतर्गत वित्तीय संस्थानों से वित्तीय सहायता दिलाने हेतु प्रशिक्षण दिए जाने का कार्यक्रम शुरू किया गया है। जिससे युवा स्वयं का उद्यम /व्यवसाय शुरू कर सकेंगे। रायपुर में इस प्रोजेक्ट का एक केंद्र खोला गया है।

प्रोजेक्ट के अंतर्गत प्रशिक्षण के सम्बंध में जानकारी देते हुए प्रोजेक्ट के चीफ कोऑर्डिनेटर पुष्पेंद्र सिंह ने बताया कि राज्य के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों, अर्ध-शहरी व शहरी इलाकों के युवाओं को सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम आकार के स्टार्टअप/उद्यमिता प्रारम्भ करवाने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करवाया जाएगा ।उद्यम को प्रारम्भ करने, वित्तीय संरचना, अधोसंरचना, पोषण, मार्केटिंग सहित उसकी सफलता के सभी कुंजी को भी परिभाषित करवाया जाएगा । उसके डॉक्युमेंट भी तैयार करवाए जाएँगे। उनके उद्यमों को सफल बनाने के लिए मार्केटिंग का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा जिससे उनके कम्पनी से बनने वाले प्रोडक्ट का ब्रांडिंग (वोकल फॉर लोकल) वे स्वयं कर सकें।

उन्होंने आगे बताया की इस प्रोजेक्ट का सीधा उद्देश्य उद्यमिता स्थापित करवाना है, जिसके अंतर्गत युवाओं को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी या एलएलपी या वन पर्सन कंपनी खुलवाने के लिए कंपनी का रजिस्ट्रेशन करवाया जाएगा ।
उस उद्योग को प्रारंभ करने के लिए भूमि की व्यवस्था हेतु प्रपोजल तैयार कराए जाएंगे। जिससे वे अपने उद्योग की स्थापना करवाने के लिए सरकार की योजनाओं के माध्यम से औद्योगिक भूमि ले सकेंगे। साथ में एक डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट डीपीआर तथा इंजीनियरिंग प्रोक्योरमेंट कंस्ट्रक्शन ईपीसी की रिपोर्ट तैयार कराकर शासकीय योजनाओं के माध्यम से एक उद्यम /उद्योग स्थापित करवाया जाएगा। उद्यम /उद्योग के प्रोडक्शन को क्वालिटी कंट्रोल करने के लिए आवश्यक लाइसेंस भारत सरकार से एवं यदि आप का प्रोडक्ट वैश्विक बाजार में बेचना है, तो अंतरराष्ट्रीय लाइसेंस दिलवाया जाएगा , ऑनलाइन एवं अन्य बड़ी कंपनियों के साथ भी टाइ अप कराया जाएगा जैसे अमेजॉन, बिग बाजार, रिलायंस, डी मार्ट जैसे व्यापारिक संस्थानों से टाई अप कराने से जो प्रोडक्ट है उसकी बेहतर मार्केटिंग की व्यवस्था कराई जाएगी।इस प्रकार से इस प्रोजेक्ट में कुल 5400 अलग-अलग उद्योग को 6 राज्यों में स्थापित करवाना है और इसका कार्य शुरू हो चुका है और इस शासकीय प्रोजेक्ट में जो भी भाई बंधू उद्यमी या उद्योगपति बनना चाहते हैं इसका लाभ ले सकते हैं।

सिंह ने प्रेस नोट के माध्यम से बताया की इस प्रोजेक्ट के माध्यम से सामाजिक सेवा उद्योग, मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स, रसायन और रासायनिक उत्पाद, कृषि उपकरण और मशीनरी निर्माता, इलेक्ट्रिकल मशीनरी पार्ट्स, मशीनरी और पार्ट्स इलेक्ट्रिकल सामानों को छोडक़र, एफपीसी एग्रो / हॉर्टिकल्चर सेक्टर, बेसिक मेटल इंडस्ट्रीज, हार्डवेयर, हैंडीक्राफ्ट सेक्टर, ड्रिंक्स एंड बेवरेज सेक्टर, बम्बू वर्क सेक्टर, ग्लास वर्क सेक्टर, पेपर प्रोडक्ट्स और प्रिंटिंग-स्टेशनरी प्रोडक्ट्स, कॉस्मेटिक्स प्रोडक्ट्स, हेल्थकेयर उत्पाद, होजयरी और गारमेंट्स – लकड़ी उत्पाद-कपड़ा क्षेत्र, सूती वस्त्र, खेल वस्तुएं, पूजा उत्पाद, परिवहन उपकरण और पार्ट्स-पर्यटन और यात्रा क्षेत्र, रबड़ और प्लास्टिक उत्पाद, आयुष उत्पाद, गैर-धातु खनिज उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र, मसाले और खाद्य उत्पाद खाने के लिए तैयार, विविध उद्यमिता, अन्य सेवाएँ और उत्पाद, मरम्मत सेवाएँ इत्यादि। स्वदेशी उत्पादों का उत्पादन जिसे स्वदेशी उद्योगों / स्वदेशी उद्यम के माध्यम से मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स, एग्रो मशीनरी, फूड प्रोसेसिंग से लेकर सोलर एनर्जी तक के स्टार्टअप शुरू करवाए जाएँगे, जिसमें अकेले छत्तीसगढ़ राज्य में पाँच लाख करोड़ के उद्यमिता /उद्योग के कारोबार शुरू होने की सम्भावना है तथा प्रदेश में लाखों युवाओं को रोजगार मिलेगा।

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