सेवा की कहानी: मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से आधा हुआ अमोली का मंडी आने-जाने का किराया
पहले ऑटो से सफर में लगते थे 50 से 60 रुपये, अब करीब 30 रुपये में बस से पहुंच रहे मंडी’
रायपुर, 04 अक्टूबर 2026/मंडी तक आने-जाने में होने वाला खर्च किसी छोटे सब्जी विक्रेता की रोज की कमाई को सीधे प्रभावित करता है। सरगुजा जिले के कल्याणपुर क्षेत्र में सब्जी बेचकर परिवार की आजीविका चलाने वाले अमोली के लिए मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना इसी खर्च को कम करने का माध्यम बनी है। पहले मंडी जाने के लिए उन्हें ऑटो में 50 से 60 रुपये तक किराया देना पड़ता था, अब ग्रामीण बस सेवा से यही सफर करीब 30 रुपये में पूरा हो रहा है। किराये में हुई इस बचत से उनके सब्जी व्यवसाय के रोजमर्रा के खर्च में राहत मिली है।
सेवा संकल्प अभियान के तहत सामने आई अमोली की यह ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि ग्रामीण परिवहन की सुविधा केवल गांव से बाजार तक पहुंच आसान नहीं करती, बल्कि छोटे व्यवसायियों के परिवहन खर्च को कम कर उनकी आजीविका में भी सहयोगी बन सकती है।
’फूलझर नाला के पास सब्जी बेचकर चलाते हैं आजीविका’
अमोली कल्याणपुर में फूलझर नाला के पास सब्जी बेचकर अपनी आजीविका चलाते हैं। व्यवसाय के लिए उन्हें नियमित रूप से मंडी जाकर सब्जियां और अन्य जरूरी सामान लाना पड़ता है। पहले मंडी तक पहुंचने के लिए वे ऑटो पर निर्भर थे। अधिक किराया लगने के कारण उनकी कमाई का एक हिस्सा आने-जाने में ही खर्च हो जाता था।
मंडी से सामान लेकर वापस लौटने में भी परिवहन खर्च होता था। ऐसे में छोटे स्तर पर सब्जी व्यवसाय करने वाले अमोली के लिए किराये पर होने वाला खर्च महत्वपूर्ण था।
’50-60 रुपये की जगह अब करीब 30 रुपये में मंडी तक सफर’
मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना शुरू होने के बाद अमोली को मंडी आने-जाने में राहत मिली है। वे बताते हैं कि अब करीब 30 रुपये किराया देकर बस से मंडी पहुंच जाते हैं। मंडी से सब्जियां और अन्य सामान लेकर वापस आने में भी सुविधा हुई है।
परिवहन पर कम राशि खर्च होने से व्यवसाय की लागत घटाने में मदद मिल रही है। अमोली बताते हैं कि कई बार बाजार में सब्जियों का भाव कम मिलने के कारण अपेक्षित कमाई नहीं हो पाती। ऐसी स्थिति में आने-जाने के किराये में होने वाली बचत उनके लिए मायने रखती है।
’“अब मंडी से सब्जी और सामान लाने में भी सुविधा हो गई है”’
मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से मिली सुविधा पर खुशी जाहिर करते हुए अमोली कहते हैं, “पहले ऑटो में किराया ज्यादा लगता था। अब बस में करीब 30 रुपये किराया लगता है। मंडी से सब्जी और सामान लाने में भी सुविधा हो गई है।”
उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को बस सेवा की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।
’आवागमन की सुविधा बनी आजीविका में बचत का माध्यम’
मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का एक वर्ष पूरा होने के अवसर पर अमोली का अनुभव ग्रामीण परिवहन सुविधा के आजीविका से जुड़े प्रभाव को सामने लाता है। उनके लिए बस केवल मंडी तक पहुंचने का साधन नहीं, बल्कि रोजमर्रा के व्यावसायिक खर्च में बचत का माध्यम भी बनी है।
सेवा संकल्प अभियान के तहत अमोली की यह कहानी बताती है कि गांवों को बाजार और मंडियों से बेहतर परिवहन सुविधा के माध्यम से जोड़ने से छोटे व्यवसायियों के लिए आवागमन आसान होने के साथ उनकी आजीविका के खर्च को कम करने में भी मदद मिल रही है।
