बक्कावागु नाला पर 200 बोल्डर चेक डेम से जल संरक्षण को मिली मजबूती

वीबी-जी राम-जी के तहत 2.34 लाख रुपये व्यय, 782 मानव दिवस का हुआ सृजन
बीजापुर 28 सितम्बर 2026/ग्राम पंचायत वाडला क्षेत्र में वर्षा के दौरान नाले में पानी के तेज बहाव के कारण वर्षा जल पर्याप्त मात्रा में संरक्षित नहीं हो पाता था। पानी तेजी से बह जाने के कारण क्षेत्र में जल संरक्षण और भू-जल पुनर्भरण की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। ग्रामीणों की इस आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए विकसित भारत रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम-जी) के अंतर्गत बक्कावागु नाला में 200 नग बोल्डर चेक डेम निर्माण कार्य स्वीकृत किया गया।
2.66 लाख रुपये की राशि स्वीकृत, 2.34 लाख रुपये हुए व्यय
ग्राम पंचायत वाडला द्वारा स्वीकृत कार्य का क्रियान्वयन किया गया। कार्य के लिए 2 लाख 66 हजार रुपये की राशि स्वीकृत की गई, जिसमें से 2 लाख 34 हजार 600 रुपये व्यय हुए। निर्माण कार्य में स्थानीय ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया गया, जिससे कुल 782 मानव दिवस का सृजन हुआ। इससे ग्रामीण परिवारों को गांव में ही रोजगार का अवसर मिला और उनकी आजीविका को आर्थिक सहयोग प्राप्त हुआ।
वर्षा जल के संरक्षण और भू-जल पुनर्भरण में होगा लाभ
बोल्डर चेक डेम के निर्माण से नाले में बहने वाले वर्षा जल की गति को नियंत्रित करने और पानी को अधिक समय तक रोकने में मदद मिलेगी। इससे मृदा कटाव को कम करने के साथ-साथ भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलेगा। जल संरक्षण की यह संरचना क्षेत्र में उपलब्ध जल संसाधनों के बेहतर उपयोग में सहायक होगी। इसके साथ ही, कार्य के माध्यम से ग्रामीणों में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ी है। जल संरक्षण के लिए किए गए इस प्रयास से आने वाले समय में क्षेत्र की जल उपलब्धता को बेहतर बनाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
जल संरक्षण के साथ ग्रामीणों को मिला रोजगार
बक्कावागु नाला पर बोल्डर चेक डेम का निर्माण जल संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण रोजगार सृजन का भी प्रभावी उदाहरण बना है। 782 मानव दिवस के रोजगार से स्थानीय श्रमिकों को गांव के आसपास ही काम मिला, जिससे रोजगार के लिए अन्य स्थानों पर जाने की आवश्यकता कम हुई।
ग्राम पंचायत वाडला में 2 लाख 34 हजार 600 रुपये के व्यय से निर्मित 200 नग बोल्डर चेक डेम जल संरक्षण, भू-जल पुनर्भरण और स्थानीय रोजगार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। यह कार्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ ग्रामीण परिवारों की आजीविका को मजबूत करने की दिशा में सार्थक प्रयास के रूप में सामने आया है।

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