स्व-सहायता समूह से जुड़कर प्रीति पटेल बनी आत्मनिर्भर, बदली आर्थिक तस्वीर
बेमेतरा 19 फरवरी 2026/- शासन की महत्वाकांक्षी ग्रामीण आजीविका योजनाओं ने आज गांव-गांव की महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया है। ऐसी ही प्रेरक मिसाल हैं ग्राम धोबानी खुर्द की श्रीमती प्रीति पटेल, जिन्होंने स्व-सहायता समूह से जुड़कर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ की, बल्कि आत्मनिर्भरता की नई पहचान भी बनाई। आज वे “लखपति दीदी” के रूप में अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी हैं।
प्रीति पटेल बताती हैं, “मेरा नाम प्रीति पटेल है और मैं ग्राम धोबानी खुर्द की निवासी हूं। पहले मेरी आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर थी। परिवार का भरण-पोषण करना कठिन हो रहा था। 01 जून 2018 को मैं लक्ष्मी स्व-सहायता समूह से जुड़ी। इसके बाद मेरे जीवन में बदलाव की नई शुरुआत हुई।” वे आगे बताती हैं कि समूह से जुड़ने के पश्चात उन्हें सामुदायिक निवेश निधि (CIF) के रूप में 60,000 रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। इसके साथ ही बैंक से ऋण लेकर उन्होंने सब्जी एवं बड़ी (पापड़-बड़ी) निर्माण का कार्य प्रारंभ किया। नियमित आय शुरू होने से परिवार की आर्थिक स्थिति में तेजी से सुधार आया।
प्रीति कहती हैं, “समूह की मदद और शासन की योजनाओं के सहयोग से मैंने सब्जी उत्पादन के साथ-साथ बकरी पालन और गाय पालन का कार्य भी शुरू किया। आज मैं एक सक्रिय महिला सदस्य के रूप में गांव की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित करती हूं।”
राज्य शासन की महिला सशक्तिकरण एवं ग्रामीण आजीविका योजनाओं—विशेष रूप से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) तथा “लखपति दीदी” अभियान—के तहत महिलाओं को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण एवं विपणन सहयोग प्रदान किया जा रहा है। इन योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना और उनकी वार्षिक आय को एक लाख रुपये से अधिक तक पहुंचाना है।
प्रीति पटेल को शासन की आवास योजना का भी लाभ मिला है। उन्होंने बताया कि बैंक ऋण लेकर तथा शासकीय सहायता से उन्होंने अपना पक्का घर बनवाया है। “पहले कच्चे घर में रहते थे, आज हमारा खुद का पक्का मकान है। यह सब समूह से जुड़ने और शासन की योजनाओं के कारण संभव हुआ,” वे गर्व से कहती हैं।
प्रीति पटेल की सफलता यह दर्शाती है कि यदि महिलाएं संगठित होकर स्व-सहायता समूह से जुड़ें और शासन की योजनाओं का लाभ उठाएं, तो वे आर्थिक रूप से सशक्त बनकर अपने परिवार और समाज की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। उनकी यह यात्रा ग्रामीण महिलाओं के लिए आशा, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की प्रेरक कहानी बन चुकी है।
