न्यायालयों में लंबित मामलों को कम करने तथा विवादों को मुकदमे-पूर्व चरण में निपटाने के लिए विधिक सेवा संस्थानों द्वारा लोक अदालतों का आयोजन
Delhi, Aug 3 पिछले तीन वर्षों और चालू वर्ष के दौरान राष्ट्रीय लोक अदालतों, राज्य लोक अदालतों और स्थायी लोक अदालतों (सार्वजनिक उपयोगिता सेवाएं) द्वारा आयोजित लोक अदालतों की संख्या और निपटाए गए मामलों का राज्य/संघ राज्य क्षेत्र-वार और वर्ष-वार ब्यौरा क्रमशः अनुबंध-ए, अनुबंध-बी और अनुबंध-सी में दिया गया है। लोक अदालतों का आयोजन विधिक सेवा संस्थानों द्वारा ऐसे अंतरालों पर किया जाता है, जैसा कि वे न्यायालयों में लंबित मामलों को कम करने और मुकदमेबाजी से पहले के चरण में विवादों को निपटाने के लिए उचित समझते हैं। लोक अदालतें स्थायी संस्था नहीं हैं और संबंधित न्यायालयों द्वारा संदर्भित लंबित न्यायालय मामलों का निपटान करती हैं। चूंकि लोक अदालतें स्थायी प्रकृति की नहीं होती हैं, इसलिए सभी अनसुलझे मामले संबंधित न्यायालयों में वापस कर दिए जाते हैं और इसलिए वे लोक अदालतों में लंबित नहीं रहते हैं। यह उल्लेख किया गया है कि किसी भी प्रकार की लोक अदालत के गठन से पहले कोई विशिष्ट निपटान लक्ष्य निर्धारित नहीं किया जाता है। सरकार ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों के माध्यम से कानूनी सहायता कार्यक्रमों को लागू करने के लिए पिछले तीन वर्षों और चालू वर्ष (जुलाई, 2024 तक) के दौरान राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) को निम्नलिखित अनुदान सहायता जारी की है: (करोड़ रुपए में) वर्ष जारी की गई धनराशि 2021-22…
