पशुओं में बीमारी की रोकथाम के लिए 15 से टीकाकरण अभियान

महासमुंद। पशुधन में फैलने वाली खुरहा-चपका (एफएमडी) जैसी गंभीर और अत्यधिक संक्रामक बीमारी की रोकथाम के लिए भारत सरकार के राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत जिले में व्यापक टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में जिले में खुरहा-चपका रोग के टीकाकरण का सातवां चरण 15 मार्च से प्रारंभ होगा। इस अभियान के अंतर्गत पशुधन विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर डोर-टू-डोर पशुओं का टीकाकरण करेंगी। साथ ही टीकाकरण से संबंधित सभी जानकारी भारत पशुधन पोर्टल में आॅनलाइन दर्ज की जाएगी, जिससे पशुओं के स्वास्थ्य का डिजिटल रिकॉर्ड भी सुरक्षित रहेगा। उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवाएं डॉ. अंजना नायडू ने बताया कि खुरहा-चपका रोग एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है, जो पिकॉर्ना वायरस के कारण होती है। यह रोग मुख्य रूप से गाय, भैंस, भेड़, बकरी और सूअर जैसे खुर वाले पशुओं को प्रभावित करता है। इस वायरस के सात प्रकार पाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि यह बीमारी संक्रमित पशुओं के सीधे संपर्क, दूषित उपकरण, वाहन, चारा और पानी के माध्यम से तेजी से फैलती है। कई बार यह संक्रमण हवा के जरिए भी फैल सकता है, जिससे पूरे क्षेत्र में पशुधन को खतरा पैदा हो जाता है। खुरहा-चपका रोग से प्रभावित पशुओं में मुंह, पैरों और थनों पर दर्दनाक फफोले हो जाते हैं तथा 105 से 108 डिग्री फारेनहाइट तक तेज बुखार आ सकता है। जिससे दूध उत्पादन में भारी कमी आती है, गर्भपात की संभावना बढ़ जाती है और पशुओं का वजन भी कम होने लगता है। विशेषज्ञों के अनुसार एफएमडी के खिलाफ टीकाकरण इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। सामान्यत: 4 से 6 माह की आयु के गोवंशीय एवं भैंस वंशीय पशुओं को यह टीका लगाया जाता है, जिसके बाद हर 6 से 12 महीने में बूस्टर डोज देना आवश्यक होता है। भारत सरकार द्वारा वर्ष 2019 से राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य देश में खुरहा-चपका रोग को वर्ष 2025 तक नियंत्रित करना और 2030 तक पूरी तरह समाप्त करना है।