बालक छात्रावास में ‘जीवन के रंग खुशियों के संग’
महासमुंद। जिले के पिथौरा स्थित पोस्ट मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास में ‘जीवन के रंग खुशियों के संग’ प्रोजेक्ट के तहत एक प्रेरणादायक और सकारात्मक पहल देखने को मिल रही है। प्रोजेक्ट संकल्प से प्राप्त प्रशिक्षण के बाद छात्रावास के वातावरण में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है, जिससे बच्चों के व्यवहार, सोच और आपसी संबंधों में सकारात्मकता का संचार हुआ है। अब छात्रावास के छात्र एक-दूसरे को गुड मॉर्निंग और गुड नाइट के स्थान पर ‘हैप्पी मॉर्निंग, हैप्पी इवनिंग और हैप्पी नाइट’ कहकर संबोधित करते हैं। इस छोटे से बदलाव ने पूरे छात्रावास में उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा का माहौल बना दिया है। इस पहल का एक और सराहनीय पहलू यह है कि छात्रावास में कार्यरत चतुर्थ वर्ग कर्मचारियों को अब केवल कर्मचारी नहीं बल्कि ‘सहयोगी’ के रूप में सम्मान दिया जा रहा है। इससे कर्मचारियों में भी आत्मसम्मान और आत्मीयता की भावना बढ़ी है और वे बच्चों के साथ अधिक जुड़ाव महसूस कर रहे हैं। प्रोजेक्ट के अंतर्गत बच्चों को कई प्रेरणादायक कहानियां सुनाई गईं, जो प्रशिक्षण के दौरान साझा की गई थीं। इन कहानियों से प्रेरित होकर छात्रों ने उन्हें अपने गांव और घर जाकर परिवार तथा अन्य बच्चों को भी सुनाया। इससे सकारात्मक सोच का यह संदेश समाज तक भी पहुंच रहा है। इसके अलावा बच्चों को सफलता के 10 मंत्र बताए गए और उन्हें अपने जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। बच्चों ने इन मंत्रों को समझते हुए स्वयं उनके पोस्टर भी तैयार किए, ताकि वे रोज उन्हें देखकर प्रेरणा ले सकें और अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ सकें। छात्रावास में बच्चों और सहयोगी कर्मचारियों ने मिलकर किचन गार्डन भी तैयार किया है। इस पहल से बच्चों में सामूहिक कार्य की भावना, जिम्मेदारी और प्रकृति के प्रति लगाव बढ़ रहा है।
