3100 में धान खरीदी पर किसान कांग्रेस ने उठाए सवाल, 3500 रुपए क्विंटल की मांग
मानिक साहू बोले- बढ़ती लागत के दौर में किसानों को लाभकारी मूल्य जरूरी, एग्रीस्टेक और डिजिटल सर्वे की खामियां दूर करने की मांग
महासमुंद। छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी के साय कैबिनेट के फैसले पर जिला किसान कांग्रेस अध्यक्ष मानिक साहू ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार तीसरे वर्ष 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदी कर रही है, जबकि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। उन्होंने धान का मूल्य कम से कम 3500 रुपए प्रति क्विंटल किए जाने की मांग की है। कैबिनेट के निर्णय के मुताबिक खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में 27.50 लाख से अधिक किसानों से अधिकतम 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से धान खरीदा जाएगा।
मानिक साहू ने कहा कि पिछले वर्षों में धान के एमएसपी में वृद्धि हुई है, लेकिन खाद, बीज, कीटनाशक, मजदूरी और कृषि कार्यों की लागत भी बढ़ी है। ऐसे में किसानों को केवल खरीदी की मात्रा और केंद्र बढ़ाने से राहत नहीं मिलेगी, बल्कि उनकी उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने इस वर्ष 360 नए उपार्जन केंद्र शुरू करने की बात कही है, जिससे कुल खरीदी केंद्रों की संख्या 3100 होगी। लेकिन किसानों के सामने वास्तविक चुनौती उनकी उपज का उचित मूल्य और खरीदी प्रक्रिया में आने वाली तकनीकी दिक्कतों को दूर करना है।
एग्रीस्टेक और डिजिटल सर्वे पर चिंता
मानिक साहू ने एग्रीस्टेक पंजीयन और डिजिटल क्रॉप सर्वे के जरिए रकबा निर्धारण की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि तकनीकी अथवा अन्य कारणों से यदि कोई पात्र किसान पंजीयन या रकबा संबंधी त्रुटि के कारण धान बेचने से वंचित होता है तो उसके लिए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि खसरा नंबर, रकबे अथवा फसल संबंधी रिकॉर्ड में त्रुटियों की शिकायतों का समय रहते निराकरण नहीं हुआ तो किसानों को खरीदी के दौरान कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं। इससे खरीदी अवधि में उनकी उपज बेचने में परेशानी पैदा हो सकती है।
खरीदी से पहले शिकायतों के निराकरण की मांग
किसान कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकार से मांग की कि धान खरीदी शुरू होने से पहले एग्रीस्टेक और डिजिटल क्रॉप सर्वे से जुड़ी शिकायतों का त्वरित निराकरण किया जाए। पात्र किसानों को तकनीकी खामियों के कारण उपज बेचने से वंचित न किया जाए और शिकायतों के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए।
उन्होंने कहा कि किसानों के हित में व्यवस्था केवल खरीदी का लक्ष्य बढ़ाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। सरकार को उपज का लाभकारी मूल्य, पारदर्शी रकबा निर्धारण और समयबद्ध शिकायत निवारण सुनिश्चित करना चाहिए।
