खैर तस्करी के ‘काले कारोबार’ पर पुलिस ने कसा शिकंजा, 70 टन लकड़ी जब्त
हिमाचल से गुरुग्राम तक ताबड़तोड़ दबिश, तस्करी की कमाई के 1.70 करोड़ रुपए नकद बरामद; श्री बालाजी ट्रेडिंग के गोदाम से 15 टन अवैध खैर जब्त
महासमुंद। खैर लकड़ी की तस्करी के लिए फर्जी एनओसी, कूटरचित दस्तावेज और फर्जी बिलिंग के जरिए खड़ा किए गए अंतरराज्यीय नेटवर्क पर पुलिस ने बड़ा प्रहार किया है। पुलिस की विशेष टीम ने ओडिशा, मध्यप्रदेश, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश तक फैले तस्करी सिंडिकेट के ठिकानों पर दबिश देकर अब तक 70 टन अवैध खैर लकड़ी जब्त की है। वहीं हिमाचल प्रदेश में तस्करी की लकड़ी को खपाने में मदद करने वाले ठिकानों पर कार्रवाई करते हुए 1 करोड़ 70 लाख रुपए की नकदी बरामद की गई है। हरियाणा के गुरुग्राम स्थित आरोपी की फर्म श्री बालाजी ट्रेडिंग के गोदाम से करीब 15 टन खैर लकड़ी भी पुलिस के हाथ लगी है।
इस मामले में पुलिस ने अंतरराज्यीय फर्जी बिलिंग सिंडिकेट के कथित सक्रिय सदस्य और शिव ट्रेडर्स के संचालक सतपाल सिंह (67) को हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के कालाअंब से गिरफ्तार किया है। आरोपी को स्थानीय न्यायालय से ट्रांजिट रिमांड पर लेकर महासमुंद लाया गया है। अब उसे न्यायिक रिमांड के लिए न्यायालय में पेश किया जा रहा है।
23.350 टन खैर की खेप में फर्जीवाड़े से खुला नेटवर्क
मामले की शुरुआत वन परिक्षेत्र अधिकारी पिथौरा की शिकायत से हुई। खैर लकड़ी की 23,350 किलोग्राम खेप के अवैध परिवहन के लिए इस्तेमाल की गई एनटीपीएस एनओसी में कूटरचना कर उसे असली दस्तावेज की तरह इस्तेमाल करने और धोखाधड़ी के आरोप में थाना पिथौरा में 9 जुलाई 2026 को अपराध दर्ज किया गया था। पुलिस ने मामले में बीएनएस की धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2), 61(2), 3(5), 111, आर्म्स एक्ट की धारा 25 तथा भारतीय वन अधिनियम की धारा 42(1), 41(2)(ख)(घ) और 52(1) के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की।
पहले घर से 81 लाख, अब 1.70 करोड़ और बरामद
जांच के दौरान पुलिस ने तस्करी से अर्जित रकम के आर्थिक नेटवर्क पर भी शिकंजा कसना शुरू किया। इससे पहले 7 सितंबर 2026 को आरोपी मनीष अग्रवाल के ग्राम मुड़पार, थाना सरसींवा स्थित मकान पर दबिश देकर 81 लाख रुपए नकद बरामद किए गए थे।
इसके बाद हिमाचल प्रदेश में कार्रवाई के दौरान मनीष अग्रवाल और संजय छाबड़िया द्वारा खैर लकड़ी की तस्करी से अर्जित बताई गई 1.70 करोड़ रुपए की नकदी बरामद कर जब्त की गई। पुलिस अब अपराध से अर्जित संपत्ति और आर्थिक लाभों की भी जांच कर रही है।
गुरुग्राम के गोदाम में छिपाकर रखी थी 15 टन खैर
महासमुंद पुलिस की टीम ने 10 अक्टूबर 2026 को हरियाणा के गुरुग्राम जिले के पटौदी तहसील अंतर्गत ग्राम बहोड़ा कलां स्थित आरोपी मनीष अग्रवाल की फर्म श्री बालाजी ट्रेडिंग के गोदाम में दबिश दी। तलाशी के दौरान गोदाम में करीब 15 टन अवैध खैर लकड़ी मिली, जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया। पुलिस के मुताबिक, अब तक ओडिशा, मध्यप्रदेश, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में की गई कार्रवाई में कुल 70 टन अवैध खैर लकड़ी जब्त की जा चुकी है।
फर्जी बिलों को वैध दिखाने बैंक खातों से करोड़ों का खेल
जांच में पुलिस को कथित तौर पर यह भी पता चला है कि सतपाल सिंह ने अपनी फर्म शिव ट्रेडर्स के जरिए अखिलेश सिंघल, पारितोष मिश्रा, मनीष अग्रवाल, संजय छाबड़िया सहित अन्य आरोपियों के साथ मिलकर सुनियोजित तरीके से फर्जी बिलिंग का नेटवर्क संचालित किया।
पुलिस के अनुसार, बिना वास्तविक प्रतिबंधित खैर लकड़ी की आपूर्ति प्राप्त किए शैल फर्मों से बड़े पैमाने पर फर्जी बिल लिए जाते थे। इसके बाद उन्हें वैध दिखाने के लिए कथित रूप से वन विभाग के फर्जी ट्रांजिट पास तैयार किए जाते थे और एचएसएन कोड का दुरुपयोग किया जाता था। वित्तीय लेन-देन की जांच में पिछले करीब तीन वर्षों के दौरान बैंक खातों में दर्जनों बार लेन-देन किए जाने और करोड़ों रुपए का भुगतान किए जाने की जानकारी सामने आई है।
तीन आरोपी गिरफ्त में, आर्थिक नेटवर्क की भी पड़ताल
इस मामले में सतपाल सिंह की गिरफ्तारी से पहले पुलिस पारितोष मिश्रा (47), संचालक पीयूष इंटरप्राइजेस, ओडिशा और अखिलेश सिंघल (52), संचालक सिंघल इंटरप्राइजेस, संबलपुर को 14 सितंबर 2026 को गिरफ्तार कर चुकी है।
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों, फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों, लकड़ी की खरीद-फरोख्त और उसे खपाने वाले नेटवर्क तथा पैसों के लेन-देन की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
अपराध की कमाई पर भी चलेगा पुलिस का डंडा
पुलिस ने जब्त नकदी और अपराध से अर्जित आर्थिक लाभ को आरोपियों से अलग करने की दिशा में भी कार्रवाई शुरू कर दी है। इसके लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 107 के प्रावधानों के तहत वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का कहना है कि मामले में अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़े अन्य ठिकानों और आरोपियों की तलाश जारी है।
खैर लकड़ी की तस्करी के इस मामले में महासमुंद पुलिस की लगातार अंतरराज्यीय कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि फर्जी एनओसी, कागजी बिलिंग और वन संपदा की तस्करी के सहारे खड़ा किया गया नेटवर्क अब पुलिस की रडार पर है।
