कीलों की सेज पर लेटकर पेट में ज्योति कलश, नौ दिन की कठोर साधना में लीन भक्तिन
रेवा गांव में मां काली-दुर्गा के दरबार में आस्था का अनूठा स्वरूप, 11 किलो लोहे की कीलों से बनी खाट पर साधना; 71 मनोकामना ज्योति कलश प्रज्वलित
महासमुंद। नवरात्र का पर्व आस्था, भक्ति और साधना का पर्व है। इन नौ दिनों में देवी आराधना के कई ऐसे दृश्य सामने आते हैं, जो भक्तों की अटूट श्रद्धा और समर्पण को दर्शाते हैं। खल्लारी विधानसभा के अंतिम छोर पर बसे ग्राम रेवा में भी नवरात्र के दौरान भक्ति और कठोर साधना का ऐसा ही अनूठा स्वरूप देखने को मिल रहा है। यहां मां काली और मां दुर्गा के दरबार में दैवीय माता की पुजारिन जानकी यादव (37) लकड़ी की खाट में लगी लोहे की नुकीली कीलों पर पीठ के बल लेटकर पेट के ऊपर जलता हुआ मनोकामना ज्योति कलश रखकर नौ दिनों की साधना कर रही हैं।
जानकारी के अनुसार, जानकी यादव पति गणपत यादव ने नवरात्र पर्व की विधिवत पूजा-अर्चना के बाद यह कठिन साधना शुरू की है। जिस लकड़ी की खाट पर वह लेटी हैं, उसमें करीब 11 किलो लोहे की कीलें लगी हुई हैं। इन नुकीली कीलों की सेज पर लेटकर वह पेट के ऊपर प्रज्वलित ज्योति कलश रखे हुए हैं। इसके साथ ही वह नौ दिनों तक निर्जला व्रत रखकर साधना में लीन हैं।
पिछले वर्ष भी की थी ऐसी साधना
जानकी यादव की इस साधना की चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है। बताया गया कि इससे पहले भी उन्होंने पिछले वर्ष नवरात्र पर्व के दौरान लोहे की कीलों से बनी सेज पर लेटकर पेट के ऊपर ज्योति कलश रखकर नौ दिनों तक साधना की थी। इस बार भी उनकी साधना देखने और माता के दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंच रही है।
उनके शिष्य पीलाबाबू ने बताया कि मंदिर परिसर में इस नवरात्र कुल 71 मनोकामना ज्योति कलश प्रज्वलित किए गए हैं। नवरात्र के दौरान प्रतिदिन यहां माता जस सेवा का आयोजन भी हो रहा है।
कई गांवों से पहुंच रहे जस सेवा के दल
ग्राम रेवा स्थित मां दुर्गा के दरबार में नवरात्र के दौरान लगातार माता जस सेवा का आयोजन किया जा रहा है। रेवा के अलावा मोंगरापाली, सरायपाली, डोंगरीपाली सहित आसपास के गांवों से जस सेवा के दल पहुंच रहे हैं। मांदर की धुन और भक्ति गीतों के बीच श्रद्धालु माता की आराधना कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, नवरात्र के अलावा भी इस दरबार में पूरे वर्ष पूजा-अर्चना होती रहती है। प्रत्येक माह सोमवार और मंगलवार को विशेष पूजा-अर्चना के साथ दरबार लगता है। बताया गया कि वर्ष 2023 से लगातार यहां यह दरबार आयोजित हो रहा है, जिसमें स्थानीय लोगों के साथ आसपास के गांवों से भी श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।
रेवा में नवरात्र के इन दिनों मां काली और मां दुर्गा के दरबार में भक्ति का यह अनूठा दृश्य श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। कीलों की सेज पर साधना और पेट पर प्रज्वलित ज्योति कलश के साथ नौ दिनों की यह साधना देवी के प्रति श्रद्धा और समर्पण के एक विशेष धार्मिक स्वरूप के रूप में लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है।
