महासमुंद में मानव तस्करी के बड़े नेटवर्क पर पुलिस का शिकंजा
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10 ठिकानों पर एक साथ छापा, 1.48 करोड़ रुपए नकद बरामद; पांच आरोपी गिरफ्तार, मास्टरमाइंड मुकेश चंद्राकर बताया गया
महासमुंद। जिले में पुलिस ने मानव तस्करी और कथित बंधुआ मजदूरी से जुड़े एक बड़े संगठित नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार यह नेटवर्क छत्तीसगढ़ के साथ पड़ोसी ओडिशा समेत अन्य राज्यों तक फैला हुआ था। जांच के दौरान पुलिस ने नेटवर्क से जुड़े 10 ठिकानों पर एक साथ दबिश देकर 1 करोड़ 48 लाख 54 हजार 750 रुपए नकद बरामद किए हैं। कार्रवाई में मजदूरों के पलायन से जुड़े रजिस्टर-डायरियां, मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड, मॉर्गेज संबंधी दस्तावेज और नोट गिनने की मशीन समेत कई महत्वपूर्ण सामग्री जब्त की गई है।
नाबालिग से जुड़े मामले की जांच में खुला नेटवर्क
पुलिस कप्तान प्रभात कुमार ने खुलासा करते हुए बताया कि, पूरे मामले की जांच की शुरुआत 21 सितंबर 2026 को अस्पताल से मिले मेमो से हुई। इसमें एक नाबालिग के शारीरिक शोषण और गर्भवती होने की जानकारी सामने आई थी। एसपी ने बताया कि प्रारंभिक जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को मानव तस्करी, बंधुआ मजदूरी और मजदूरों के संगठित पलायन से जुड़े नेटवर्क के सुराग मिले। इसके बाद पुलिस ने संदिग्ध ठिकानों और नेटवर्क से जुड़े लोगों की गतिविधियों की जांच शुरू की।
एडवांस देकर मजदूरों को दूसरे राज्यों में भेजने का आरोप
एसपी का कहना है कि गिरोह के सदस्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों और मजदूरों को एडवांस रकम का लालच देकर अपने नेटवर्क में शामिल करते थे। इसके बाद उन्हें छत्तीसगढ़ से दूसरे राज्यों में ईंट भट्ठों और अन्य स्थानों पर मजदूरी के लिए भेजा जाता था। पुलिस के अनुसार कुछ मामलों में मजदूरों पर डर, दबाव और धमकी का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
जांच के दौरान मिले दस्तावेजों के आधार पर पुलिस ने दावा किया है कि नेटवर्क के माध्यम से बड़ी संख्या में मजदूरों को अलग-अलग राज्यों में भेजा गया। पुलिस के मुताबिक आरोपियों के नेटवर्क में हजारों मजदूरों से संबंधित रिकॉर्ड मिले हैं। इनमें कथित बंधुआ मजदूरी से जुड़े दस्तावेजी साक्ष्य भी जांच के दौरान सामने आए हैं।
रजिस्टर से लेकर बैंक खातों तक मिले अहम सुराग
छापेमारी के दौरान पुलिस को मजदूरों के पलायन से संबंधित रजिस्टर और डायरी के अलावा बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड और मॉर्गेज से जुड़े दस्तावेज मिले। मौके से नोट गिनने की मशीन भी जब्त की गई है। पुलिस इन दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के जरिए कथित नेटवर्क के आर्थिक लेन-देन और दूसरे राज्यों में मजदूरों की आवाजाही की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
पांच आरोपी गिरफ्तार, मुकेश चंद्राकर को मास्टरमाइंड बताया
पुलिस ने मामले में मुकेश चंद्राकर, लता सवर, नंदू मोहंती, पीयूष अग्रवाल और मनीष गुप्ता को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार मुकेश चंद्राकर को नेटवर्क का मुख्य आरोपी और कथित मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।
जांच में पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि मजदूरों को एडवांस रकम देकर दूसरे राज्यों में भेजा जाता था। पुलिस का आरोप है कि वहां उनसे कठिन परिस्थितियों में काम कराया जाता था और उनकी आवाजाही पर नियंत्रण रखा जाता था।
नाबालिगों और महिलाओं की तस्करी के एंगल पर भी जांच
पुलिस अब इस नेटवर्क के मानव तस्करी के साथ-साथ नाबालिगों की तस्करी, बाल मजदूरी तथा महिलाओं और नाबालिग बालिकाओं के कथित शोषण से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रही है। जब्त मोबाइल फोन, बैंक खातों और दस्तावेजों की जांच से नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका सामने आने की उम्मीद पुलिस ने जताई है।
बीएनएस की गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज
मामले में थाना खल्लारी में अपराध दर्ज किया गया है। पुलिस ने BNS की धारा 143(2), 143(3), 143(4), 3(5) तथा संगठित अपराध से संबंधित धारा 111 के तहत कार्रवाई की है। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और साक्ष्यों के आधार पर मामले में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो सकती है।
यह सामग्री हुई जब्त
– 1,48,54,750 नकद
– मजदूर पलायन से संबंधित रजिस्टर और डायरियां
– कई मोबाइल फोन
– बैंक पासबुक एवं चेकबुक
– एटीएम कार्ड
– मॉर्गेज संबंधी दस्तावेज
– नोट गिनने की मशीन
कई राज्यों तक नेटवर्क की कड़ियां तलाश रही पुलिस
पुलिस की जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि इस कथित नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं, अलग-अलग राज्यों में कितने मजदूरों को भेजा गया और पूरे नेटवर्क का आर्थिक लेन-देन कितना बड़ा है। जब्त दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच के बाद नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और संभावित पीड़ितों की जानकारी सामने आने की संभावना है।
