लखपति दीदी योजना से संवरी तृप्ति चक्रधारी की ज़िंदगी
दुर्ग, 17 सितम्बर 2026/ देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सेवा सुशासन का 25 वर्षाे का एक लंबा अंतराल पूर्ण हो रहा है। उनके नेतृत्व में हुए कार्याे और परिवर्तन को आज हर प्रदेशवासी व हितग्राही अपने जीवन में अनुभव कर रहा है। इसी कड़ी में ग्राम थनौद की रहने वाली तृप्ति चक्रधारी आज ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का एक उदाहरण बन चुकी हैं। कभी साधारण घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली तृप्ति ने अपनी कलात्मक क्षमता और मेहनत के दम पर न केवल अपनी पहचान बनाई, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता की एक नई मिसाल भी पेश की है।
हुनर को मिला ’लखपति दीदी’ योजना का संबल
तृप्ति चक्रधारी के हाथों में मिट्टी और मूर्तिकला का अद्भुत हुनर था। वे हर प्रकार की सुंदर और आकर्षक मूर्तियां बनाने में माहिर हैं-चाहे गणेश उत्सव हो, दुर्गा पूजा हो या स्थानीय देवी-देवताओं की प्रतिमाएं। हालांकि वित्तीय सहायता के अभाव में उनके इस हुनर को वह उड़ान नहीं मिल पा रही थी जिसकी वे हकदार थीं। एक दिन शासन की ’लखपति दीदी योजना’ उनके जीवन में एक नया मोड़ लेकर आई। इस योजना से जुड़कर तृप्ति को आवश्यक प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और स्व-सहायता समूह के माध्यम से मार्गदर्शन मिला। योजना के प्रोत्साहन से उन्होंने अपने मूर्तिकला के काम को बड़े स्तर पर शुरू किया और व्यावसायिक रूप दिया।
सालाना 3 से 4 लाख की आय
अपनी लगन, कड़ी मेहनत और मूर्तियों की उत्कृष्ट फिनिशिंग के बल पर तृप्ति के काम की मांग आसपास के गांवों और शहरों में तेजी से बढ़ने लगी। लखपति दीदी योजना के सशक्त माध्यम से वे आज हर प्रकार की मूर्तियों का निर्माण और बिक्री कर सालाना 3 से 4 लाख रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। तृप्ति चक्रधारी कहती है कि यदि पारंपरिक हुनर को सही सरकारी योजनाओं का सहयोग मिले, तो ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से पूर्णतः सशक्त हो सकती हैं। आज तृप्ति राज्य सरकार और जिला प्रशासन को धन्यवाद देते हुए कहती है कि वह न केवल आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि अपने परिवार को एक बेहतर भविष्य प्रदान करते हुए क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी स्व-रोजगार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
