सौर ऊर्जा से रोशन हुआ बैगा आवासीय विद्यालय, अंधेरे से मिली स्थायी मुक्ति

डीएमएफ की 5.38 लाख रुपये की लागत से स्थापित सोलर हाईमास्ट बना विद्यार्थियों की सुविधा और सुरक्षा का नया सहारा
रायपुर, 10 सितंबर 2026/ एमसीबी जिले के दूरस्थ एवं वनांचल क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में जिला प्रशासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक असर अब धरातल पर दिखाई दे रहा है। भरतपुर विकासखंड के विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा आवासीय विद्यालय नौढिया में स्थापित सोलर हाई मास्ट संयंत्र इसका बेहतर उदाहरण है। जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) मद से 5.38 लाख रुपये की लागत से स्थापित इस संयंत्र ने विद्यालय परिसर को रात के अंधेरे से स्थायी राहत दिलाई है।
दुर्गम क्षेत्र में पहुंची उजाले की सुविधा
विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा आवासीय विद्यालय नौढिया जिला मुख्यालय से लगभग 130 किलोमीटर दूर दुर्गम एवं वनांचल क्षेत्र में स्थित है। आवासीय विद्यालय होने के कारण यहां विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए रात्रि के समय पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था बेहद जरूरी थी।
जिला प्रशासन एमसीबी के प्रयासों से इस समस्या का स्थायी समाधान निकालते हुए क्रियान्वयन एजेंसी क्रेडा के माध्यम से विद्यालय परिसर में सोलर हाई मास्ट संयंत्र स्थापित किया गया। सौर ऊर्जा से संचालित यह संयंत्र दिन में सूर्य की रोशनी से ऊर्जा संचित करता है और रात में उसी ऊर्जा का उपयोग परिसर को रोशन करने में करता है।
बिजली गुल होने पर भी परिसर में कायम रहती है रोशनी
सोलर हाईमास्ट की स्थापना के बाद विद्यालय परिसर की रात्रिकालीन प्रकाश व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। बिजली जाने के बाद भी सोलर हाईमास्ट के माध्यम से परिसर में रोशनी बनी रहती है। यह संयंत्र अपने आसपास लगभग 50 मीटर तक के क्षेत्र को प्रकाशमान करता है। इससे विद्यालय परिसर में रात के समय विद्यार्थियों के आवागमन में सुविधा के साथ सुरक्षा की भावना भी मजबूत हुई है।
विद्यालय के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने इस सुविधा को उपयोगी बताते हुए जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि पहले बिजली चले जाने पर परिसर में अंधेरा हो जाता था, लेकिन अब सोलर हाईमास्ट के कारण पूरी रात पर्याप्त प्रकाश उपलब्ध रहता है।
स्वच्छ ऊर्जा से सुविधा और आत्मनिर्भरता की ओर कदम
नौढिया विद्यालय में स्थापित सोलर हाई मास्ट केवल प्रकाश व्यवस्था का साधन नहीं, बल्कि दूरस्थ क्षेत्र में सौर ऊर्जा के उपयोग और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में सार्थक पहल है। इससे बिजली पर निर्भरता कम होने के साथ विद्यालय परिसर में बेहतर, सुरक्षित और निरंतर प्रकाश व्यवस्था उपलब्ध हुई है।
डीएमएफ की 5.38 लाख रुपये की लागत से किया गया यह कार्य दूरस्थ क्षेत्र की वास्तविक आवश्यकता को पूरा करने और बैगा विद्यार्थियों को सुरक्षित एवं बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में जिला प्रशासन की प्रभावी पहल है।