स्मार्ट मीटर से नहीं बढ़ती बिजली खपत, अध्ययन में सामने आए तथ्य
दुर्ग, बालोद और बेमेतरा के तुलनात्मक अध्ययन में जुलाई माह में बिजली खपत में 53 से 56 प्रतिशत तक की कमी दर्ज
बेमेतरा 28 जुलाई 2026/- छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (सीएसपीडीसीएल), दुर्ग क्षेत्र द्वारा स्मार्ट मीटर को लेकर फैलाई जा रही भ्रांतियों और अफवाहों के बीच तीन जिलों—दुर्ग, बालोद एवं बेमेतरा—में स्मार्ट मीटर लगे घरेलू उपभोक्ताओं की बिजली खपत का तुलनात्मक अध्ययन कराया गया। मई, जून और जुलाई 2026 के आंकड़ों के विश्लेषण में यह स्पष्ट हुआ कि जुलाई माह में अधिकांश उपभोक्ताओं की बिजली खपत में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। अध्ययन से यह भी सामने आया कि बिजली की खपत स्मार्ट मीटर के कारण नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं द्वारा विद्युत उपकरणों के वास्तविक उपयोग पर निर्भर करती है।
दुर्ग शहर में 400 यूनिट से अधिक मासिक खपत वाले 240 चयनित स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के अध्ययन में जुलाई माह में कुल बिजली खपत 76,257 यूनिट दर्ज की गई, जबकि जून में यह 1,65,411 यूनिट और मई में 1,75,451 यूनिट थी। इस प्रकार जुलाई में लगभग 53 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई।
इसी प्रकार बालोद शहर के 241 चयनित स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं में जुलाई माह की कुल खपत 74,847 यूनिट रही, जबकि जून में 1,62,127 यूनिट और मई में 1,54,110 यूनिट दर्ज की गई। यहां भी जुलाई में लगभग 54 प्रतिशत की कमी देखने को मिली।
बेमेतरा डिवीजन के बेमेतरा टाउन क्षेत्र में 400 यूनिट से अधिक मासिक खपत वाले 241 चयनित उपभोक्ताओं के विश्लेषण में मई माह की खपत 1,59,812 यूनिट, जून में 1,79,401 यूनिट तथा जुलाई में घटकर 78,902 यूनिट दर्ज की गई। इस प्रकार जुलाई माह में लगभग 56 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई।
अध्ययन के दौरान यह भी पाया गया कि जिन उपभोक्ताओं के यहां अभी स्मार्ट मीटर नहीं लगे हैं, उनकी बिजली खपत में भी मई और जून माह में पिछले वर्ष की तुलना में वृद्धि तथा जुलाई माह में कमी दर्ज हुई है। इससे स्पष्ट है कि अधिक बिजली खपत का कारण स्मार्ट मीटर नहीं, बल्कि गर्मी के मौसम में एयर कंडीशनर एवं अन्य विद्युत उपकरणों का अधिक उपयोग है।
कंपनी ने बताया कि जिन उपभोक्ताओं की मासिक खपत 400 यूनिट से अधिक रहती है, उन्हें मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान योजना का लाभ नहीं मिल पाता, जिससे उनके बिजली बिल अधिक दिखाई देते हैं। हालांकि जुलाई माह में खपत कम होने से अगस्त में जारी होने वाले बिजली बिलों में राहत मिलने की संभावना है तथा अधिक उपभोक्ता योजना का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।
सीएसपीडीसीएल ने यह भी जानकारी दी कि स्वीकृत भार से अधिक बिजली उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं के लिए अब सप्लाई अफोर्डिंग शुल्क की व्यवस्था में बदलाव किया गया है। अब लगातार तीन माह तक उच्चतम मांग अधिक दर्ज होने पर यह राशि वर्ष में केवल एक बार दिसंबर माह के बिल (जो जनवरी में जारी होगा) में जोड़ी जाएगी।
उपभोक्ता स्मार्ट मीटर से संबंधित अपनी दैनिक बिजली खपत ‘मोर बिजली’ ऐप के माध्यम से देख सकते हैं। सामान्य मीटर वाले उपभोक्ता भी इसी ऐप पर मासिक खपत की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही शिकायतों एवं शंकाओं के समाधान के लिए टोल फ्री नंबर 1912 उपलब्ध है।
कंपनी ने बताया कि उपभोक्ताओं की शिकायतों के परीक्षण के लिए अब तक लगभग 4,500 चेक मीटर लगाए जा चुके हैं। इन सभी में दर्ज बिजली खपत स्मार्ट मीटर की रीडिंग के अनुरूप पाई गई है। कंपनी ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे स्मार्ट मीटर के संबंध में किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारी पर विश्वास न करें तथा बिजली खपत की वास्तविक जानकारी मोर बिजली ऐप एवं स्मार्ट मीटर पोर्टल के माध्यम से स्वयं देखें। इससे बिजली उपयोग की निगरानी के साथ अनावश्यक खपत पर भी प्रभावी नियंत्रण रखा जा सकता है।
