सुकमा में ‘सशक्त आंगनबाड़ी अभियान’ से बच्चों की शिक्षा को मिल रही नई दिशा
आंगनवाड़ी केंद्रों में पहुंच रहे प्राथमिक स्कूलों के शिक्षक
सुकमा, 24 जूलाई 2026/जिला प्रशासन और नीति आयोग के संयुक्त समन्वय से जिले में बच्चों की शुरुआती शिक्षा को मजबूत बनाने के उद्देश्य से ‘सशक्त आंगनवाड़ी अभियान’ की शुरुआत की गई है। कलेक्टर अमित कुमार के निर्देशन एवं मार्गदर्शन में महिला एवं बाल विकास विभाग तथा शिक्षा विभाग के समन्वय से संचालित इस अभिनव पहल के तहत अब आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ सहयोगी के रूप में समीपस्थ प्राथमिक स्कूलों के शिक्षक भी आंगनवाड़ी केंद्रों में पहुंचकर बच्चों को सीखने-सिखाने की प्रक्रिया से जोड़ रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य 3 से 6 वर्ष के बच्चों को स्कूल जाने से पहले ही सीखने के लिए तैयार करना और उनकी शैक्षणिक नींव को मजबूत बनाना है।
अभियान के तहत शिक्षक निर्धारित दिवसों पर आंगनवाड़ी केंद्रों में पहुंचकर बच्चों को खेल-खेल में अक्षर ज्ञान, गिनती, कहानी, बालगीत और विभिन्न समूह गतिविधियों के माध्यम से शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। इससे बच्चों में सीखने के प्रति उत्साह और रुचि बढ़ने के साथ-साथ वे विद्यालय के वातावरण से भी सहज रूप से परिचित हो रहे हैं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि शिक्षकों के सहयोग से उन्हें भी बच्चों को पढ़ाने के नए और प्रभावी तरीके सीखने का अवसर मिल रहा है। वहीं अभिभावक भी इस सकारात्मक पहल का उत्साहपूर्वक समर्थन कर रहे हैं। आंगनवाड़ी और स्कूल के इस समन्वय से बच्चों के पोषण के साथ उनकी शिक्षा और सर्वांगीण विकास को भी मजबूती मिल रही है।
इसी क्रम में गुरुवार को आंगनवाड़ी केंद्र मुरतोंडा में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता चिंगी नाग एवं शिक्षिका परिणीता कश्यप द्वारा 16 बच्चों का रोचक एवं सहभागितापूर्ण शिक्षण सत्र आयोजित किया गया। वहीं आंगनवाड़ी केंद्र गोलागुड़ा में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता साधना नाग की उपस्थिति में शिक्षिका जयमाला ने 17 बच्चों को खेल-खेल में विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों से जोड़ा। बच्चों ने उत्साहपूर्वक गतिविधियों में भाग लिया और आनंद के साथ सीखने का अनुभव प्राप्त किया। इस दौरान सेक्टर पर्यवेक्षक रामपुरम यशबाला सिंह ठाकुर की उपस्थिति में कार्यक्रम का सफल संचालन एवं समन्वय सुनिश्चित किया गया।
जिला प्रशासन की यह पहल प्रारंभिक बाल शिक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम के रूप में सामने आ रही है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की आत्मीयता और अनुभव तथा शिक्षक की शैक्षणिक दक्षता का यह समन्वय बच्चों के भविष्य की मजबूत नींव तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस अभिनव प्रयास से बच्चों में सीखने की ललक बढ़ने, विद्यालय के प्रति सहजता विकसित होने और आगे चलकर स्कूल छोड़ने की दर में कमी आने की उम्मीद है। साथ ही, पोषण और शिक्षा को एक साथ जोड़कर जिले के बच्चों के सर्वांगीण विकास को गति देने में ‘सशक्त आंगनवाड़ी अभियान’ निश्चित रूप से मील का पत्थर साबित होगा।
