थम थम कर हो रहीं बारिश से मौसम हुआ सुहाना, बदला मौसम का मिजाज
महासमुंद। मौसम का मिजाज फिर एक बार बदल रहा है। आज थम थम कर हो रहीं बारिश से उमस भरी गर्मी से राहत मिली है। जिले में भी बारिश को लेकर आरेंज अर्लट जारी किया गया है। जिला मुख्यालय में आज सुबह से ही रूक- रूककर बारिश जारी है। इधर, पिछले 19 दिनों में जिले में महज 57 मिमी औसत बारिश हुई है। बारिश न होने के कारण धान को पानी की कमी हो रही है। जिसका असर पैदावार पर पड़ सकता है।
मौसम विभाग के अनुसार पश्चिम मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उत्तरी आंध्र प्रदेश-दक्षिण ओड़िशा तटों पर एक सुस्पष्ट निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इससे जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण समुद्र तल से 9.6 किमी ऊपर तक फैला हुआ है और ऊँचाई के साथ दक्षिण-पश्चिम की ओर झुक रहा है। अगले 12 घंटों के दौरान इसके एक अवदाब में परिवर्तित होने और 19 अगस्त की दोपहर के आसपास दक्षिण ओड़िशा आंध्र प्रदेश तटों को पार करने की संभावना है। इसके अलावा एक मानसून द्रोणिका गुजरात से जलगांव, ब्रम्हापुरी, जगदलपुर होते हुए पूर्वी बंगाल की खाड़ी तक समुद्र तल से 1.5 किमी ऊपर तक फैला हुआ है जिससे प्रदेश के मध्य व दक्षिण में एक-दो स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है। जिसका असर जिले में भी पड़ने वाला है। नया सिस्टम बनने से जिले में अच्छी बारिश होने की संभावना है। जिले में एक जून से एक अगस्त तक 532.4 मिमी औसत बारिश हुई थी। अगस्त माह के इन 19 दिनों में मात्र 57 मिमी बारिश ही हुई है जिसके बाद कुल बारिश का आंकड़ा 589.4 तक ही पहुंचा है। आज सुबह से ही जिले के कई हिस्सों बारिश हो रही है।
फसलों के लिए वरदान होगी बारिश
बारिश न होने से केवल बारिश के भरोसे क्षेत्र में अब धान की फसलों पर असर पड़ने लगा है। इस समय पौधों को पानी की ज्यादा आवश्यकता होती है। वहीं, दवा, खाद डालने के लिये भी खेत में पर्याप्त पानी का भराव होना जरूरी है। लेकिन, पिछली बारिश की कमी से 19 दिनों में खेत सूख चुके हैं। हालाकि, जिन खेतों में कोडार का पानी पहुंच रहा है। खासतौर पर मामाभांचा, खल्लारी, कुहरी, जलकी, सिरपुर, लाफिन, बरोंडाबाजार सहित कई ग्रामों में किसान केवल बारिश के पानी के भरोसे ही खेती करते हैं। इस बार सावन समाप्त होने के बाद अच्छी बारिश अंचल में हुई नहीं है। थोड़ी-बहुत बारिश हुई है। लेकिन, वह फसलों के लिये नाकाफी है।
किसानों ने बताया कि सावन के महीने में बारिश अच्छी होती है। लेकिन, इस बार मात्र 2 बार ही झड़ी के बाद सावन का महीना बीत गया। इस बार 1 लाख हेक्टेयर भूमि में किसानों ने धान की फसल लगाई है। कुछ किसान ट्यूबवेल के माध्यम से भी सिंचाई कर रहे हैं। लेकिन, ग्रामों में लगातार लो वोल्टेज और बिजली संकट की वजह से ट्यूबवेल काम नहीं कर पा रहे हैं। खाद डालने के लिए भी अब किसानों को फिर अच्छी बारिश का इंतजार है। क्योंकि, धान के पौध मुरझाने लगे हैं। अगर मौसम विभाग की भविष्यवाणी सही होती है तो यह धान फसल के लिए बारिश वरदान साबित होगी।
