बरसते पानी में सैंकड़ों मितानिनों ने घेरा कलेक्टोरेट
एनएचएम संविदा कर्मचारियों की हड़ताल भी जारी
महासमुंद। मितानिन एवं मितानिनकर्मियों के लिए मोदी की गारंटी के तहत घोषणा पत्र में किए गए वायदे को पूरा करने एवं मितानिन कार्यक्रम का संचालन पुन: एनजीओ को दिये जाने के विरोध मेंं 7 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल कर रहीं मितानिनों ने आज बरसते पानी में कलेक्टोरेट का घेराव किया और किए गये वायदे को पूरा करने की मांग की है।
प्रदेश स्वास्थ्य मितानिन संघ एवं प्रशिक्षण कल्याण संघ की जिला अध्यक्ष आरती डड़सेना व सचिव अहिल्या साहू ने बताया कि वर्ष 2023 के लोकसभा चुनाव में मोदी की गारंटी के घोषणा पत्र में वादा किया गया था कि मितानिन प्रशिक्षक, हेल्प डेस्क फैसिलिटेटर को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) अंतर्गत संविलयन, मितानिन प्रशिक्षक, हेल्प डेस्क फैसिलिटेटर एवं ब्लॉक को-ऑडिनेटर के वेतन/क्षतिपूर्ति में 50 प्रतिशत वृद्धि एवं मितानिन प्रशिक्षक, हेल्प डेस्क फैसिलिटेटर एवं ब्लॉक को-ऑडिनेटर एनजीओ के अंतर्गत कार्य नहीं करेंगे का वादा किया गया था जो आज तक पूरा नहीं किया गया। इन तीन सूत्रीय मांगों को लेकर हम 7 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं और आज इन्हीं मांगों को लेकर कलेक्टोरेट का घेराव कर मांग पूरी करने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने पहुंची हैं। यहां अपर कलेक्टर तेजपाल ध्रुव को ज्ञापन दिया है। उन्होंने कहा कि शासन स्तर पर मांग पत्र को भेजा जाएगा। मितानिनों ने कहा कि यदि एक सप्ताह के अंदर हमारी मांगें नहीं मानी गयी तो प्रदेश स्तर पर मुख्यमंत्री के निवास का घेराव किया जाएगा और उग्र आंदोलन किया जाएगा।
प्रभावित होगी स्वास्थ्य सेवाएं
बता दें कि जिले में 22 सौ मितानिन कार्यरत हैं जो पिछले 11 दिनों से कामबंद, कलम बंद अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। जिसका स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ रहा है। इधर, सोमवार से पिछले 20 सालों से समस्याओंं से जूझ रहे संविदा आधार पर कार्यरत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के कर्मचारियों ने आज से अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। हड़ताल का आज दूसरा दिन है । एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल से जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर असर पड़ेगा वहीं आपातकालीन सेवाएं भी बंद होने से मरीजों की परेशानी बढ़ेगी। इस दौरान आपातकालीन सेवाएं, ओपीडी, टीकाकरण, और नवजात देखभाल इकाईयां व राष्ट्रीय कार्यक्रम पूरी तरह बंद रहेंगी। इससे गर्भवती महिलाएं, नवजात शिशु और गंभीर रोगी सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।
