पीएम आवास हितग्राहियों को दूसरी व तीसरी किश्त देने में सरकार नाकाम: विनोद

महासमुंद। पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने कहा कि प्रदेश में भाजपा की साय सरकार पीएम आवास हितग्राहियों को आवास की दूसरी किश्त नहीं दे पा रही है। वहीं, पहले से जिनके पक्के मकान है उन्हें आवास हितग्राही बनाकर भ्रष्टाचार को अंजाम दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में 18 लाख आवास स्वीकृत करने का श्रेय लेने वाली भाजपा की सरकार हितग्राहियों को पहली किश्त देकर 5-6 माह बाद भी दूसरी व तीसरी किश्त देना भूल गयी है। प्रदेश के हजारों हितग्राहियों को पहली किश्त मिलने के बाद दूसरी किश्त नहीं दी जा रही है। कई हितग्राही कर्ज लेकर मकान का निर्माण शुरू किये हैं उन्हें उम्मीद है कि दूसरी किश्त जल्द आएगी और वे काम आगे बढ़ाएंगे। पहली किश्त मिलने के बाद लाभार्थियों ने काम शुरू कर दिया था। दूसरी किश्त में देरी से न केवल उनके सपनों का मकान अधूरा रह गया है बल्कि, आर्थिक संकट भी गहरा गया है। जबकि, 10-15 हजार रु लेकर पक्के मकान मालिकों को पुन: आवास हितग्राही बनाया जा रहा है। इससे पात्र हितग्राही तो वंचित होंगे ही साथ ही अपात्र व्यक्ति अधिकारी-कर्मचारी को भेंट चढ़ाकर अनुचित लाभ ले रहे हैं। श्री चंद्राकर ने कहा कि वर्तमान में पूरे प्रदेश सहित विधानसभा महासमुंद में प्रधानमंत्री आवास क्रियान्वयन एजेंसी के अधिकारी / कर्मचारियों द्वारा बिना सत्यापन के जिन्हें पात्र बताया गया है उनके पूर्व से ही पक्के मकान बने हुए हैं। इसी तरह हितग्राहियों के पूर्व से निर्मित मकान को नया मकान कागजों में दर्शाकर पीएम आवास की राशि ले रहे हैं। कितनी ऐसी शिकायतें लगातार मिल रहीं हैं। जो वास्तव में कच्चे मकान या बेघर हैं, उन्हें पात्र न बताकर 10-15 हजार रुपए आर्थिक लाभ लेकर पक्के मकान निर्मित एवं पूर्व से निर्मित मकान को पीएम आवास मकान दर्शाकर राशि का आहरण किया जा रहा है। इस तरह के भ्रष्टाचार के कारण पात्र हितग्राही पीएम आवास योजना से वंचित हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ सरकार जीरो टॉलरेंस की बात कर रही है, लेकिन उन्हीं के अधिकारी-कर्मचारी खुलेआम गरीबों के लिए बनी इस योजना में खुलेआम भ्रष्टाचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पूर्व ही पीएम आवास प्लस का सर्वे किया गया है, जिसका सत्यापन यदि सही तरीके से किया जाए तो भ्रष्टाचार के सारे खेल सामने आ जाएंगे। जिसमें पक्के मकान धारकों को भी आवासहीन बताकर हितग्राही बनाया गया है। इसका पुन: ग्रामों में जाकर सही तरीके से सत्यापन किया जाना आवासहीन व्यक्तियों के हित में होगा।