जर्जर शाला भवन में नौनिहालों को जान जोखिम में डालकर पढ़ाने को मजबूर
चारों ओर दीवारों में दरारें, छत सीपेज, टपकता है पानी
महासमुंद। नई सत्र 16 जून से शुरू हो गया है। सप्ताह भर हुए स्कूल खुले लेकिन शिक्षा विभाग का सारी व्यवस्था दुरुस्त होना का दावों की धीरे-धीरे पोल खुलने लगी है। स्कूल और शिक्षक के युक्तियुक्तकरण के बाद भी हालात सुधरने का नाम नहीं ले रही। लेकर, कहीं शिक्षक को लेकर और कहीं जर्जर स्कूल भवन को लेकर ग्रामीण कलेक्टर व शिक्षा विभाग के चक्कर काट रहे हैं।
ऐसा ही एक मामला सिरपुर के आश्रित ग्राम खमतराई का सामने आया है। यहां के 21 साल पुराना शासकीय प्राथमिक शाला भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। दीवारों में दरारें, छत की प्लस्तर टूटी हुई और दीवारों में सीपेज है। जिससे कभी भी बड़ा हादसा होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। प्रधान पाठक, पालक, शाला विकास समिति के पदाधिकारी पिछले तीन सालों से नए भवन की मांग कर रहे हैं, लेकिन नए भवन की स्वीकृति आज तक नहीं मिली और बच्चे उसी भवन में पढ़ने को मजबूर हैं। शासकीय प्राथमिक शाला खमतराई में पहली से पांचवीं तक 72 बच्चे अध्ययनरत हैं। बच्चों के पालकों ने बताया कि शाला भवन का निर्माण वर्ष 2003-04 में हुआ था। 21 साल बाद इस भवन की दीवारों में दरारें पड़ चुकी है। छत का प्लस्तर जगह-जगह से गिर रहा है। बरसात में पानी टपकता है, बच्चे इसी भवन में पढ़ने को मजबूर हैं। बच्चों को स्कूल भेजने में डर लगता है। यहां कभी भी हादसा हो सकता है। प्रधान पाठक शोभाराम साहू ने बताया कि हमारे और शाला प्रबंधन समिति के पदाधिकारियों द्वारा पिछले तीन वर्षों से उच्च अधिकारियों को अवगत कराते हुए नए भवन की मांग की जा रही है पर आज तक नया भवन नहीं बना।
जिले में 45 भवन पूरी तरह जर्जर
शिक्षा विभाग के अनुसार जिलें में प्राथमिक स्कूल 1276, मिडिल स्कूल 492 एवं हाई व हायर सेकेंडरी स्कूल 188 कुल 1956 स्कूल हैं। जिनमें से 374 स्कूल भवन जर्जर है। इनमेंं महासमुंद ब्लॉक के 163, बागबाहरा के 74, पिथौरा के 78, बसना के 47 और सरायपाली ब्लॉक के 11 शाला भवन शामिल हैं। इन भवनों में 45 शाला भवन अति जर्जर हो चुके हैं, जिसे डिस्मेंटल किया जाना है। इसी डिस्मेंटल स्कूल भवनों में से एक है शासकीय प्राथमिक शाला खमतराई का स्कूल भवन।
शाला खुलने से पहले ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को सभी व्यवस्था दुरुस्त करने निर्देशित किया गया था। जो भवन जर्जर हो चुके हैं उनमें शालाएं संचालित न कर वैकल्पिक व्यवस्था करने कहा गया था। बावजूद जर्जर भवनों में कक्षाएं संचालित हो रही है तो गलत है। यह बच्चों के लिए खतरनाक हो सकता है। मैं आज ही सभी ब्लॉक से जानकारी लेता हूं।
विजय कुमार लहरे
डीईओ, महासमुंद
