कोडार डायवर्सन की जर्जर नहरों की होगी मरम्मत, 1314 हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता बढ़ाने की तैयारी

विधायक ने अधिकारियों के साथ की समीक्षा बैठक, क्षतिग्रस्त लाइनिंग और रिसाव वाले हिस्सों का तत्काल निरीक्षण कर मरम्मत के दिए निर्देश
महासमुंद। करीब चार दशक पुरानी कोडार डायवर्सन परियोजना की क्षतिग्रस्त नहरों और संरचनाओं के मरम्मत कार्य को लेकर विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में परियोजना की मौजूदा स्थिति, मुख्य एवं माइनर नहरों की हालत, क्षतिग्रस्त सीमेंट-कांक्रीट लाइनिंग और पानी के रिसाव की समस्या पर विस्तार से चर्चा की गई। विधायक ने अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर आवश्यक मरम्मत कार्य शुरू कराने तथा मैदानी स्तर पर निरीक्षण कर समस्याओं का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
विधायक सिन्हा ने कहा कि नहरों और परियोजना की प्रमुख संरचनाओं का नियमित रखरखाव बेहद जरूरी है। लाइनिंग क्षतिग्रस्त होने से पानी का रिसाव बढ़ता है और इसका सीधा असर सिंचाई क्षमता पर पड़ता है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सभी प्रमुख संरचनाओं एवं नहरों का स्थल निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का आकलन करें और जहां भी लाइनिंग टूट-फूट गई है या रिसाव की समस्या है, वहां तत्काल आवश्यक कार्रवाई की जाए। साथ ही मरम्मत कार्यों की नियमित समीक्षा करने के निर्देश भी दिए।
40 साल पुरानी परियोजना, 2126 हेक्टेयर में होती है सिंचाई
कोडार डायवर्सन परियोजना महासमुंद विकासखंड के ग्राम कौंवाझर के समीप कोडार नदी पर निर्मित है। करीब 40 वर्ष पुरानी इस परियोजना से वर्तमान में खरीफ फसल के लिए लगभग 2126.20 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होती है। परियोजना की मुख्य नहर करीब 13,680 मीटर लंबी है। इससे जुड़ी छह माइनर नहरों के जरिए गोपालपुर, बेलटुकरी, अछोली, तुमगांव, अमावस सहित आसपास के गांवों के खेतों तक पानी पहुंचता है।
लाइनिंग क्षतिग्रस्त, रिसाव से प्रभावित हो रही सिंचाई क्षमता
वर्तमान में मुख्य नहर और माइनर नहरों के कई हिस्सों की सीमेंट-कांक्रीट लाइनिंग क्षतिग्रस्त हो चुकी है। इसके चलते कई स्थानों पर पानी के रिसाव की समस्या सामने आ रही है। इससे नहरों की जल वहन क्षमता प्रभावित होने के साथ सिंचाई के लिए उपलब्ध पानी का भी नुकसान हो रहा है। विभागीय स्तर पर इन क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत को प्राथमिकता देने की तैयारी है।
मरम्मत के बाद 1314.80 हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता का लक्ष्य
विभागीय आंकलन के अनुसार क्षतिग्रस्त लाइनिंग और संबंधित संरचनाओं की मरम्मत पूरी होने के बाद करीब 1314.80 हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता विकसित होने की संभावना है। इससे न केवल पानी के रिसाव में कमी आएगी, बल्कि परियोजना की सिंचाई क्षमता को भी बेहतर तरीके से बनाए रखने में मदद मिलेगी। बैठक में अधिकारियों को मैदानी समस्याओं की सतत निगरानी और मरम्मत कार्यों की समयबद्ध प्रगति सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।

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